Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryगुना जिले के बमोरी स्थित प्रसिद्ध केदारनाथ धाम में पहाड़ी की चट्टान में आई खतरनाक दरार के कारण मंदिर परिसर को दो साल पहले ही बंद कर दिया गया था। इसके बावजूद लोग सुरक्षा निर्देशों की अनदेखी कर दूसरे रास्तों से मंदिर तक पहुंच रहे हैं, जिससे बड़े हादसे का खतरा बना हुआ है।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/guna-story-54388ccf
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteगुना जिले के बमोरी क्षेत्र में स्थित ऐतिहासिक केदारनाथ धाम शिव मंदिर को दो साल पहले ही आम जनता के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया था। मंदिर के ऊपर स्थित पहाड़ी की चट्टान में एक बड़ी और खतरनाक दरार आ गई है, जिसके चलते प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से यह कदम उठाया था। हालांकि, प्रतिबंध के बावजूद लोग विभिन्न वैकल्पिक रास्तों से मंदिर परिसर तक पहुंच रहे हैं, जिससे उनकी जान को गंभीर खतरा हो सकता है। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteदो वर्षों से बंद है धाम Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteबमोरी विधानसभा क्षेत्र में स्थित केदारनाथ धाम शिव मंदिर जिले का एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। सावन के महीने और महाशिवरात्रि जैसे पर्वों पर यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। वर्षा ऋतु में यहां के झरने भी बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। लेकिन, मंदिर के ठीक ऊपर मौजूद विशाल चट्टान में लगातार चौड़ी होती दरार को देखते हुए, प्रशासन ने लगभग दो साल पहले पूरे क्षेत्र में आम लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी थी। Add text below Add image below04Heading Paragraph Heading Subheading Quoteताला लगा होने के बावजूद पहुंच रहे लोग Add text below Add image below05Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteमंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार पर ताला लगा हुआ है, लेकिन इसके बावजूद कुछ लोग अन्य रास्तों से पहाड़ी के नीचे उतरकर मंदिर परिसर तक पहुंच रहे हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि ये लोग उसी क्षतिग्रस्त चट्टान के नीचे से गुजरते हैं, जहां कभी भी भू-स्खलन या चट्टान गिरने की आशंका बनी हुई है। यह स्थिति किसी भी समय एक बड़े हादसे का कारण बन सकती है। Add text below Add image below06Heading Paragraph Heading Subheading Quoteरील और वीडियो शूटिंग बन रही खतरे की वजह Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteप्रतिबंध के बावजूद, सोशल मीडिया पर सामग्री बनाने वाले लोगों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है। कई लोग मंदिर परिसर में रील, ब्लॉग और वीडियो शूट कर रहे हैं, जबकि कुछ तो गर्भगृह तक पहुंचकर गानों की शूटिंग भी कर रहे हैं। इन वीडियो को सोशल मीडिया पर साझा किया जा रहा है, जिससे अन्य लोग भी वहां जाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं और अनजाने में अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। Add text below Add image below08Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteवन विभाग के प्रतिवेदन के बाद भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) के वरिष्ठ भू-वैज्ञानिक मनोज कुमार ने स्थल का निरीक्षण किया था। उनकी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि क्षतिग्रस्त चट्टान कभी भी गिर सकती है और वहां आम लोगों की मौजूदगी एक गंभीर दुर्घटना को न्योता दे सकती है। रिपोर्ट में चट्टान को हटाने या सुरक्षा के लिए कंक्रीट की दीवार बनाने तक पूरे क्षेत्र को बंद रखने की सिफारिश की गई थी। Add text below Add image below09Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteजीएसआई की रिपोर्ट और वन विभाग की सिफारिशों के आधार पर, तत्कालीन कलेक्टर ने सुरक्षा कारणों से केदारनाथ धाम मंदिर क्षेत्र को अगले आदेश तक आमजन के लिए बंद करने का आदेश जारी किया था। इसके बावजूद, लोग इन निर्देशों की अनदेखी कर लगातार वहां पहुंच रहे हैं, जिससे प्रशासन की चिंताएं बढ़ गई हैं। Add text below Add image below10Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteस्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन ने प्रवेश पर रोक तो लगा दी है, लेकिन निगरानी के अभाव में लोग आसानी से दूसरे रास्तों से अंदर पहुंच रहे हैं। ऐसे में यदि चट्टान गिरने जैसी कोई दुर्घटना होती है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी, यह एक बड़ा और अनुत्तरित सवाल बना हुआ है। Add text below Add image below