Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryकेंद्र सरकार की चार नई श्रम संहिताओं के विरोध में गुना में विभिन्न ट्रेड यूनियनों और किसान मोर्चा ने जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान कलेक्ट्रेट पहुंचकर कार्यकर्ताओं ने गिरफ्तारियां दीं और राज्यपाल के नाम प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/guna-story-53729b9f
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteराष्ट्रीय आह्वान के तहत गुना जिले में संयुक्त ट्रेड यूनियन और किसान मोर्चा के बैनर तले विभिन्न कर्मचारी संगठनों, सीटू तथा अन्य श्रमिक यूनियनों ने मिलकर एक विशाल विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया। इस आंदोलन में बड़ी संख्या में मजदूर और किसान शामिल हुए। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteडाक बंगले पर हुई सभा, नेताओं ने की एकजुटता की वकालत Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteकलेक्ट्रेट तक मार्च निकालने से पहले स्थानीय डाक बंगला परिसर में एक सभा का आयोजन किया गया। इस सभा को सीटू के राज्य उपाध्यक्ष डॉ. विष्णु शर्मा, जिला अध्यक्ष सुरेंद्र सैनी, महासचिव गिरीश कश्यप, ज्ञानेश मेर, आंगनबाड़ी यूनियन की नेता किरण तिवारी, कृष्णा कुशवाह, आशा-ऊषा यूनियन की नेता मिथलेश गोस्वामी, रामवती शिकारी और इंटक नेता राजेंद्र तिवारी सहित कई प्रमुख वक्ताओं ने संबोधित किया। Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteवक्ताओं ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान समय में देश गंभीर आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संकटों से जूझ रहा है। ऐसे दौर में देश की मुख्य उत्पादक ताकतें यानी मजदूरों और किसानों का एकजुट होना बेहद आवश्यक हो गया है। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading Quoteचार नई श्रम संहिताओं पर उठाए गए गंभीर सवाल Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteप्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार द्वारा लाई गई चार नई श्रम संहिताओं का पुरजोर विरोध किया। नेताओं का आरोप था कि सरकार ने भारतीय श्रम सम्मेलन बुलाए बिना और बिना किसी व्यापक चर्चा के 21 नवंबर 2025 को इन संहिताओं को अधिसूचित कर दिया था, और इसके बाद 8 से 9 मई 2026 के बीच इनकी नियमावली भी जारी कर दी गई। Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteसभा में वक्ताओं ने यह भी चेतावनी दी कि मध्य प्रदेश सरकार भी इन संहिताओं के नियम लागू करने की प्रक्रिया में जुटी हुई है। उनके अनुसार, इन नए कानूनों से ट्रेड यूनियनों का अस्तित्व संकट में पड़ जाएगा क्योंकि यूनियनों का नया पंजीकरण कराना और उनकी मान्यता बनाए रखना बेहद कठिन हो जाएगा, जबकि आसानी से पंजीकरण रद्द किए जा सकेंगे। Add text below Add image below08Heading Paragraph Heading Subheading Quoteहड़ताल के अधिकार और कार्य समय को लेकर जताई चिंता Add text below Add image below09Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteश्रमिक नेताओं ने आरोप लगाया कि इन संहिताओं के जरिए नियोक्ताओं द्वारा किए जाने वाले नियमों के उल्लंघनों को वैध ठहराया जा रहा है। स्थिति ऐसी बनाई जा रही है जिससे उद्योगपतियों व नियोक्ताओं को राहत मिले और ट्रेड यूनियन तथा उनके नेता अपराधी की तरह प्रतीत हों। Add text below Add image below10Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइसके अलावा कार्यस्थल के निरीक्षण के लिए ऑनलाइन चयन प्रणाली, हड़ताल करने के कानूनी अधिकार को पेचीदा बनाने, काम के घंटे बढ़ाने और निश्चित अवधि के रोजगार को बढ़ावा देने जैसी नीतियों का कड़ा विरोध किया गया। वक्ताओं ने कहा कि इन बदलावों से अधिकांश श्रमिकों की आजीविका और सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडराने लगा है। Add text below Add image below11Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteविस्तृत प्रदर्शन और नारेबाजी के पश्चात संयुक्त ट्रेड यूनियन मोर्चा और किसान मोर्चा के कार्यकर्ता जुलूस के रूप में कलेक्ट्रेट पहुंचे। वहां उन्होंने अपनी मांगों के समर्थन में गिरफ्तारियां दर्ज कराईं और अंत में राज्यपाल के नाम संबोधित एक ज्ञापन जिला कलेक्टर को सौंपा। Add text below Add image below