Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryनारायणपुरा शक्कर कारखाना फिर से चालू करने और बकाया भुगतान की मांग को लेकर किसानों ने शास्त्री पार्क से कलेक्ट्रेट तक आक्रोश रैली निकाली। पिछले आठ साल से बंद पड़े इस कारखाने के कारण किसानों और कर्मचारियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/guna-story-50965a31
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteगुना जिले में लंबे समय से बंद पड़ी नारायणपुरा शक्कर फैक्ट्री को दोबारा शुरू कराने और किसानों के बकाए का भुगतान कराने की मांग को लेकर स्थानीय अन्नदाताओं ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। इसी कड़ी में 'नारायणपुरा शक्कर कारखाना चालू करो संघर्ष समिति' के बैनर तले किसानों ने शहर में विरोध प्रदर्शन किया। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteशास्त्री पार्क से निकाली गई विरोध रैली Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteआंदोलन के तहत बड़ी संख्या में किसान सबसे पहले स्थानीय शास्त्री पार्क में एकत्र हुए। यहां सभा के बाद किसानों ने कलेक्ट्रेट तक एक रैली निकाली। यह रैली शहर के प्रमुख मार्गों जैसे लक्ष्मीगंज, सदर बाजार, निचला बाजार, हाय रोड और हनुमान चौराहा से होते हुए जिला कलेक्टर कार्यालय पहुँची, जहाँ प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा गया। Add text below Add image below04Heading Paragraph Heading Subheading Quoteआठ साल से ठप है कारखाने का संचालन Add text below Add image below05Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteकिसानों ने ज्ञापन में बताया कि यह शक्कर कारखाना पिछले आठ वर्षों से पूरी तरह बंद पड़ा है। वर्ष 2000 में शुरू हुआ यह प्लांट 2017 में अचानक घाटे का हवाला देकर बंद कर दिया गया था। इसके चालू रहने के दिनों में न केवल गन्ने की खेती करने वाले किसानों को अच्छा मुनाफा मिलता था, बल्कि सैकड़ों स्थायी कर्मचारियों और स्थानीय लोगों को भी रोजगार मिला हुआ था। Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteकारखाना बंद होने के बाद से ही इस क्षेत्र के किसानों और कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई है। वे लगातार इसे दोबारा शुरू कराने की मांग को लेकर आवाज उठा रहे हैं। इससे पहले भी महापंचायत और बाइक रैलियों के माध्यम से प्रशासन का ध्यान इस ओर आकर्षित किया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई है। Add text below Add image below07Heading Paragraph Heading Subheading Quoteबकाया भुगतान और सुरक्षा की उठी मांग Add text below Add image below08Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteसंघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही कारखाना शुरू नहीं किया गया और किसानों तथा कर्मचारियों के बकाए की राशि का भुगतान नहीं हुआ, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। इसके अलावा, बंद पड़े कारखाने के परिसर में लगातार हो रही चोरी की घटनाओं पर रोक लगाने और वहां पुख्ता सुरक्षा प्रबंध करने की भी पुरजोर मांग उठाई गई है। Add text below Add image below