Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryमध्य प्रदेश में फर्जी जाति प्रमाणपत्र के सहारे डीएसपी पद हासिल करने और बाद में आईपीएस बनने वाले सेवानिवृत्त अधिकारी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। शिकायत के बाद उच्च स्तरीय छानबीन समिति की जांच में प्रमाणपत्र अमान्य पाए जाने पर यह कार्रवाई की गई है।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/guna-fir-9d527278
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteगुना और भोपाल से जुड़े एक बड़े प्रशासनिक मामले में पूर्व आईपीएस अधिकारी रघुवीर सिंह मीना मुश्किलों में घिर गए हैं। पुलिस मुख्यालय की सतर्कता शाखा ने उनके विरुद्ध धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र जैसी गंभीर धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। उन पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी तरीके से अनुसूचित जनजाति वर्ग का प्रमाणपत्र हासिल कर सरकारी सेवा में अनुचित लाभ उठाया। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteशिक्षक से लेकर आईपीएस बनने तक का सफर Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteमूल रूप से गुना जिले के चाचौड़ा क्षेत्र स्थित अजगरी गांव के रहने वाले रघुवीर सिंह मीना ने शुरुआती दौर में अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण के आधार पर सरकारी शिक्षक की नौकरी पाई थी। उन्होंने चित्तोड़ा के शासकीय विद्यालय में अपनी सेवाएं दी थीं। इसके बाद वर्ष 1984 में विदिशा जिले से अनुसूचित जनजाति वर्ग का नया प्रमाणपत्र बनवाया गया, जिसके बूते उन्होंने राज्य सेवा परीक्षा पास कर डीएसपी पद प्राप्त किया। Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteकरियर के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। डीएसपी रहने के बाद वे ब्यावरा में एसडीओपी और राजगढ़ में एएसपी रहे। वर्ष 2001 में उन्हें आईपीएस अवार्ड मिला। अपने सेवाकाल में वे बड़वानी और आगर मालवा में पुलिस अधीक्षक तथा गुना व रीवा में कमांडेंट के पद पर तैनात रहे। उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें वर्ष 2005 में वीरता पदक और 2009 में राष्ट्रपति पुलिस पदक से भी सम्मानित किया गया था। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading Quoteउच्च स्तरीय जांच समिति ने खारिज किया प्रमाणपत्र Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइस पूरे मामले की सुगबुगाहट वर्ष 2016 में तब शुरू हुई जब राघौगढ़ निवासी हरवीर सिंह रघुवंशी ने इसकी शिकायत दर्ज कराई। मामला मध्य प्रदेश शासन की अनुसूचित जनजाति संदेहास्पद जाति प्रमाणपत्र उच्च स्तरीय छानबीन समिति के पास पहुंचा। समिति ने जब पुराने दस्तावेजों की गहराई से पड़ताल की, तो आदिम जाति कल्याण विभाग विदिशा द्वारा 1984 में जारी किए गए उस प्रमाणपत्र में अनियमितताएं पाई गईं। Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteछानबीन समिति ने उक्त अनुसूचित जनजाति प्रमाणपत्र को पूरी तरह से अमान्य घोषित कर दिया। समिति की रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि नियमों को दरकिनार कर यह दस्तावेज हासिल किया गया था और इसी के आधार पर लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास की गई थी। इसी रिपोर्ट को आधार बनाते हुए सतर्कता शाखा ने कानूनी कदम उठाया है। Add text below Add image below08Heading Paragraph Heading Subheading Quoteसेवानिवृत्ति के बाद लड़े थे पंचायत चुनाव Add text below Add image below09Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteदिलचस्प बात यह है कि वर्ष 2021 में पुलिस सेवा से रिटायर होने के तुरंत बाद, वर्ष 2022 में उन्होंने जिला पंचायत का चुनाव लड़ा। इस दौरान उन्होंने अनुसूचित जनजाति के बजाय अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षित सीट का विकल्प चुना, जिससे उनके द्वारा विभिन्न समयों पर इस्तेमाल किए गए वर्गों को लेकर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। फिलहाल पुलिस अधिकारी इस पूरे रिकॉर्ड की बारीकी से जांच कर रहे हैं। Add text below Add image below