Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryगुना नगरपालिका में नामांतरण मामलों के निपटारे के लिए पटवारी की विशेष नियुक्ति की गई थी। इसके बावजूद पिछले दो महीनों में स्थिति में सुधार नहीं हुआ और लंबित प्रकरणों का आंकड़ा बढ़कर नौ सौ के पार पहुंच गया है।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/guna-900-8ea2cae4
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Heading Paragraph Heading Subheading Quoteपटवारी की नियुक्ति के बाद भी नहीं सुलझे मामले Add text below Add image below02Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteगुना नगरपालिका क्षेत्र में संपत्ति के नामांतरण से जुड़े मामलों का समय पर निपटारा करने के लिए राजस्व विभाग के एक पटवारी को अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इस अनोखे प्रयोग के बाद भी नागरिकों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। राहत मिलने के बजाय नगरपालिका कार्यालय में लंबित पड़े नामांतरण मामलों की संख्या में लगातार इजाफा दर्ज किया गया है, जिससे यह व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई है। Add text below Add image below03Heading Paragraph Heading Subheading Quoteकलेक्टर के निर्देश पर मिला था अतिरिक्त प्रभार Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteप्राप्त जानकारी के अनुसार, गुना जिले के कलेक्टर के निर्देशों के तहत एसडीएम गुना ने लगभग दो महीने पहले एक विशेष आदेश जारी किया था। इस व्यवस्था के अंतर्गत गुना ग्रामीण तहसील के अंतर्गत आने वाले बरखेड़ा गिर्द हल्के के पटवारी सौरभ बंसल को एक महीने की अवधि के लिए नगरपालिका के नामांतरण प्रकरणों के भौतिक परीक्षण का जिम्मा सौंपा गया था। प्रदेश के नगरीय निकायों में यह अपने तरह का पहला मामला माना जा रहा था जब राजस्व अमले के पटवारी को नगरपालिका के भीतर इस प्रकार का प्रभार दिया गया था। Add text below Add image below05Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteजब पटवारी को यह जिम्मेदारी दी गई थी, उस वक्त नगरपालिका में नामांतरण के कुल 629 प्रकरण पेंडिंग चल रहे थे। उस समयावधि में नगरपालिका अध्यक्ष के स्तर पर एक भी फाइल लंबित नहीं थी, जबकि अधिकांश फाइलें मुख्य नगरपालिका अधिकारी के हस्ताक्षर के स्तर पर अटकी हुई थीं। इनमें वर्ष 2025 के 260 और वर्ष 2026 के 255 मामले शामिल थे। उस दौर में डिप्टी कलेक्टर के पास भी नगरपालिका सीएमओ का अतिरिक्त प्रभार रहा था। Add text below Add image below06Heading Paragraph Heading Subheading Quoteदो महीने में केवल 40 फाइलों का हो सका परीक्षण Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteप्रशासनिक स्तर पर उठाए गए इस कदम के बावजूद कामकाज की रफ्तार बेहद धीमी बनी रही। पिछले दो महीनों के भीतर नियुक्त किए गए पटवारी केवल 40 प्रकरणों का ही परीक्षण कर उन्हें आगे बढ़ा पाए हैं। धीमी कार्यप्रणाली के कारण पेंडेंसी घटने की बजाय और अधिक विकराल हो गई और वर्तमान में लंबित मामलों का आंकड़ा 900 का आंकड़ा पार कर चुका है। मौजूदा स्थिति यह है कि इनमें से एक भी प्रकरण अभी तक अंतिम स्वीकृति के लिए नगरपालिका अध्यक्ष के पास तक नहीं पहुंच पाया है। Add text below Add image below08Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteमध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 के प्रावधानों के अनुसार, निकायों में नामांतरण की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए पहले से ही उनका अपना राजस्व अमला मौजूद रहता है, जिसमें राजस्व निरीक्षक और अन्य मैदानी कर्मचारी शामिल होते हैं। नियमों के मुताबिक दस्तावेजों का परीक्षण होने के बाद फाइल सीएमओ के पास जाती है और अंत में नगरपालिका अध्यक्ष के हस्ताक्षर होने के बाद ही नामांतरण प्रक्रिया मुकम्मल होती है। बावजूद इसके पटवारी को विशेष तौर पर बैठाए जाने पर भी मामलों का अंबार लगना स्थानीय नागरिकों और जानकारों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। Add text below Add image below