Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryगुना जिले के राघौगढ़ में एक किरायेदार ने उत्तर प्रदेश के रहने वाले व्यक्ति की आड़ लेकर दंपती से बड़ी ठगी को अंजाम दिया। एनजीओ शुरू कराने और विदेश से फंड आने का झूठा लालच देकर आरोपी ने बैंक ट्रांसफर और नकदी के जरिए कुल 66 लाख रुपए हड़प लिए।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/guna-66-a461926a
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteगुना जिले के राघौगढ़ क्षेत्र में एक ठगी का बड़ा मामला सामने आया है, जहां मकान में रहने वाले एक किरायेदार ने ही दंपती को अपनी साजिश का शिकार बनाया। उत्तर प्रदेश के रहने वाले एक व्यक्ति ने एनजीओ का संचालन शुरू कराने और उसमें विदेशी फंडिंग आने का झांसा दिया और धीरे-धीरे कुल 66 लाख रुपए की धोखाधड़ी कर ली। इस घटना के सामने आने के बाद राघौगढ़ पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है और मामले की गहराई से जांच शुरू कर दी गई है। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteसाड़ा कॉलोनी में ऐसे बुना ठगी का जाल Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteराघौगढ़ की साड़ा कॉलोनी के रहने वाले राणा प्रताप सिंह ने थाने में इस संबंध में लिखित शिकायत दी थी। शिकायत में बताया गया कि उत्तर प्रदेश निवासी प्रमोद सिंह पुत्र जनार्दन सिंह साल 2022 में राणा प्रताप के मकान में किरायेदार के तौर पर रहने आया था। इसके बाद उसने धीरे-धीरे भरोसे में लेकर एनजीओ बनवाने का प्रस्ताव रखा और कहा कि इसमें एससी-एसटी वर्ग के आठ लोगों का होना अनिवार्य है। Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteआरोपी प्रमोद ने राणा प्रताप के होटल पर काम करने वाले कर्मचारियों लक्ष्मण बंजारा, फूल सिंह बंजारा, मांगी बाई जाटव, धापो बाई जाटव, दिनेश स्वीपर, दीपक प्रजापति और मुकेश बंजारा को अपने जाल में फंसाया। उसने सभी से एनजीओ के नाम पर आधार कार्ड ले लिए और वादा किया कि बाकी सारा काम वह खुद संभाल लेगा। कर्मचारियों को यह लालच दिया गया कि उन्हें हर महीने पांच-पांच हजार रुपए और साल में 50 हजार रुपए मिलेंगे। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading Quoteफर्जी खाते और दस्तावेजों का खेल Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteकर्मचारियों को बहला-फुसलाकर आरोपी ने उनके पैन कार्ड बनवाए, बैंक खाते खुलवाए, एटीएम कार्ड और चेक बुक हासिल किए, साथ ही सभी के नाम से अलग-अलग मोबाइल सिम भी ले लीं। प्रमोद एनजीओ चलाने के नाम पर राणा प्रताप से उनके होटल के कर्मचारियों के बैंक खातों में थोड़ी-थोड़ी राशि ट्रांसफर करवाता रहा। Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteपुलिस को दी गई जानकारी के मुताबिक, 13 अप्रैल 2022 से 1 जुलाई 2024 के बीच प्रमोद ने राणा प्रताप और उनकी पत्नी कुसुम सिंह के खातों से करीब 45 लाख रुपए अन्य कर्मचारियों के खातों में डलवाए और बाद में उन रुपयों को खुद निकाल लिया। इसके अलावा एनजीओ के नाम पर वह राणा प्रताप से नकद करीब 21 लाख रुपए भी ले चुका था। Add text below Add image below08Heading Paragraph Heading Subheading Quoteस्टाम्प और फर्जी चेक देकर देता रहा झांसा Add text below Add image below09Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteठगी का दायरा यहीं नहीं रुका, बल्कि आरोपी ने राणा प्रताप से गुजरात कॉरपोरेशन में फॉरेन फंडिंग एनजीओ के नाम पर लाखों रुपए के स्टाम्प भी बनवाए, जिसका भुगतान भी राणा प्रताप ने ही किया था। भरोसे में रखने के लिए प्रमोद ने राणा को यस बैंक के 20-20 लाख रुपए के कुल 20 चेक दिए, जिनमें 10 चेक राणा प्रताप और 10 चेक कुसुम सिंह के नाम थे। आरोपी ने कहा था कि फरवरी 2024 के आखिर में वे उसके खाते से पैसे निकाल लें क्योंकि तब तक विदेशी फंड आ जाएगा। Add text below Add image below10Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteप्रमोद लगातार यह आश्वासन देता रहा कि गुजरात कॉरपोरेट कंपनी उन्हें एनजीओ चलाने के वास्ते भारी लोन देगी, जबकि इन सभी खातों का संचालन खुद वही कर रहा था। इस तरह कर्मचारियों के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर और विदेशी फंडिंग का झूठा सपना दिखाकर कुल 66 लाख रुपए की ठगी को अंजाम दिया गया। पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर आरोपी प्रमोद के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। Add text below Add image below