Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryगुना जिले में सड़क दुर्घटना में हुई युवक की मौत के मामले में उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को सख्त निर्देश दिए हैं। अदालत ने टाटा एआईए लाइफ इंश्योरेंस को 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ एक करोड़ नब्बे लाख रुपये की बीमा राशि चुकाने का आदेश दिया है।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/guna-190-ec146e1f
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteगुना जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने एक महत्वपूर्ण प्रकरण में फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी को राहत देने से इनकार कर दिया है। आयोग ने टाटा एआईए लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ दाखिल किए गए परिवाद को आंशिक रूप से मंजूर कर लिया है। इसके तहत सड़क हादसे में जान गंवाने वाले अमन जाट के परिवार को बड़ी राहत मिली है। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteक्या था पूरा सड़क हादसे का मामला Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteयह पूरा घटनाक्रम 11 सितंबर 2024 का है, जब एक भीषण सड़क हादसे में कार और ट्रक की टक्कर हो गई थी। इस दुर्घटना में अमन जाट को गंभीर चोटें आईं और उनकी मौत हो गई थी। इस मामले में गुना के कैंट थाने में अपराध क्रमांक 0936/2024 दर्ज किया गया था। पुलिस ने मामले की गहन जांच पूरी करने के बाद अदालत में ट्रक चालक के खिलाफ अभियोग पत्र दाखिल किया था। Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteमृतक अमन जाट ने टाटा एआईए की परम रक्षक प्लस सोल्यूशन पॉलिसी ले रखी थी। इस बीमा पॉलिसी के तहत एक करोड़ रुपये का लाइफ कवर और एक करोड़ नब्बे लाख रुपये का एक्सीडेंटल डेथ रिस्क कवर शामिल था। इस पॉलिसी के एवज में पहली किस्त के रूप में 69,339 रुपये और दूसरी किस्त के तौर पर 70,410 रुपये जमा किए गए थे, जिसमें उनके पिता हरिसिंह जाट को नॉमिनी बनाया गया था। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading Quoteबीमा कंपनी ने खारिज कर दिया था क्लेम Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteहादसे के बाद जब परिजनों ने बीमा क्लेम के लिए आवेदन किया, तो कंपनी ने जांच बैठाई। शुरुआत में जांचकर्ता ने क्леम देने की सिफारिश की थी, लेकिन बाद में 24 फरवरी 2025 को कंपनी ने क्लेम खारिज कर दिया। कंपनी का तर्क था कि दुर्घटना से जुड़ी जानकारियों में विसंगतियां हैं और कथित चालक ऋषिकेश सेन को गंभीर चोटें नहीं आईं, जिससे दस्तावेज संदिग्ध प्रतीत होते हैं। Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteकंपनी ने यह भी दावा किया कि अमन जाट असल में चालक की सीट पर बैठे थे और तथ्यों को छिपाया गया है। इसी आधार पर कंपनी ने पॉलिसी को शून्य करार देते हुए प्रीमियम की राशि भी जब्त करने की बात कही थी। Add text below Add image below08Heading Paragraph Heading Subheading Quoteआयोग ने खारिज किए कंपनी के तर्क Add text below Add image below09Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteसुनवाई के दौरान उपभोक्ता आयोग ने पुलिस के अभियोग पत्र, तस्वीरों और अन्य दस्तावेजों का बारीकी से परीक्षण किया। आयोग ने स्पष्ट किया कि घटना के वक्त अमन जाट कार की अगली सीट पर बैठे थे और वाहन ऋषिकेश सेन चला रहे थे। ट्रक कार के पिछले हिस्से में टकराया था, जिससे अमन को घातक चोटें आईं। Add text below Add image below10Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteआयोग ने बीमा कंपनी के उस दावे को खारिज कर दिया जिसमें अमन के चालक की सीट पर होने की बात कही गई थी। अदालत ने माना कि कंपनी का रवैया सेवा में कमी और अनुचित व्यापार प्रथा को दर्शाता है, क्योंकि पॉलिसी की किसी भी शर्त का उल्लंघन साबित नहीं हुआ है। Add text below Add image below11Heading Paragraph Heading Subheading Quoteदो महीने के भीतर करना होगा भुगतान Add text below Add image below12Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteजिला आयोग ने बीमा कंपनी को आदेशित किया है कि वह फैसले की तारीख से दो महीने के भीतर एक करोड़ नब्बे लाख रुपये की दुर्घटना बीमा राशि का भुगतान परिजनों को करे। यह राशि 24 फरवरी 2025 से लेकर वास्तविक भुगतान की तिथि तक 7 प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ देनी होगी। Add text below Add image below13Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइसके अतिरिक्त, मानसिक पीड़ा के एवज में 25 हजार रुपये और वाद तथा वकील की फीस के रूप में 10 हजार रुपये यानी कुल 35 हजार रुपये अतिरिक्त अदा करने के निर्देश भी दिए गए हैं। आयोग ने यह भी साफ किया है कि यदि निर्धारित दो महीने में राशि नहीं दी गई, तो उस पर भी 7 प्रतिशत की दर से ब्याज वसूला जाएगा। Add text below Add image below