Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryदतिया स्थित मां पीतांबरा पीठ केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि राष्ट्ररक्षा और शक्ति साधना का भी बड़ा केंद्र रही है। 1962 के युद्ध के दौरान यहां विशेष अनुष्ठान हुआ था और देश के कई दिग्गज राजनेता भी यहां दर्शन के लिए आते रहे हैं।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/datia-story-d8a1f38d
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteमध्य प्रदेश के दतिया स्थित मां पीतांबरा पीठ की ख्याति देश-विदेश तक फैली है। यह स्थल केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि यहां शक्ति उपासना और राष्ट्ररक्षा से जुड़ी कई ऐतिहासिक परंपराएं भी रही हैं। यही कारण है कि आम जनता के अलावा देश के बड़े राजनेता और प्रशासक भी यहां शीश नवाने आते रहे हैं। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteस्वामीजी महाराज की तपस्थली और स्थापना Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteउपलब्ध विवरणों के अनुसार, स्वामीजी महाराज 9 जुलाई 1929 को दतिया पहुंचे थे और वनखंडेश्वर महादेव मंदिर परिसर को अपनी साधना स्थली बनाया। उस समय इस क्षेत्र को वनखंडी कहा जाता था। इसके बाद, 23 मई 1935 को उन्होंने यहां मां बगलामुखी के विग्रह की स्थापना की। शाक्त परंपरा में मां बगलामुखी को आठवीं महाविद्या माना जाता है और इनकी उपासना शत्रुओं पर विजय पाने तथा संकटों से रक्षा के लिए की जाती है। Add text below Add image below04Heading Paragraph Heading Subheading Quoteराजसत्ता की देवी के रूप में मान्यता Add text below Add image below05Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteमां बगलामुखी की आराधना से जुड़ी मान्यताओं के कारण पीतांबरा पीठ को राजसत्ता से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि यहां पूजा करने से कठिन परिस्थितियों में भी सफलता मिलती है। इसी विश्वास के चलते पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी और राजमाता विजयाराजे सिंधिया जैसी दिग्गज हस्तियां यहां दर्शन के लिए पहुंचती थीं। हालांकि, यहां आने वाले भक्तों में राजनेताओं के साथ-साथ आम श्रद्धालु भी शामिल हैं। Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteपीठ के आचार्य विष्णुकांत मुड़िया के अनुसार, मां पीतांबरा को केवल राजसत्ता देने वाली देवी मानना उनकी महिमा को सीमित करने जैसा है। वे संपूर्ण ब्रह्मांड की अधिष्ठात्री हैं और भक्तों को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थ प्रदान करती हैं। Add text below Add image below07Heading Paragraph Heading Subheading Quote1962 के युद्ध और 51 कुंडीय महायज्ञ का प्रसंग Add text below Add image below08Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइस सिद्धपीठ के इतिहास में 1962 के भारत-चीन युद्ध का प्रसंग बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। पीठ की परंपरा के अनुसार, युद्ध के समय देश की रक्षा की कामना से 19 दिसंबर 1962 को विशेष राष्ट्ररक्षा अनुष्ठान किया गया था। इस दौरान 51 कुंडीय महायज्ञ संपन्न हुआ था। धार्मिक मान्यताओं में ऐसा माना जाता है कि इस महायज्ञ के बाद चीनी सेना ने पीछे हटना शुरू कर दिया था। Add text below Add image below09Heading Paragraph Heading Subheading Quoteमां धूमावती की स्थापना Add text below Add image below10Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइस पीठ में मां बगलामुखी के साथ-साथ मां धूमावती की भी विशेष आराधना होती है। स्वामीजी महाराज ने 13 जून 1978 को मां धूमावती के विग्रह की स्थापना की थी। दस महाविद्याओं में सातवीं मानी जाने वाली मां धूमावती की उपासना वैराग्य और विपरीत परिस्थितियों से लड़ने की शक्ति प्रदान करती है, और शनिवार को यहां उनके दर्शन का खास महत्व होता है। Add text below Add image below