Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryमध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने दतिया मेडिकल कॉलेज में नर्सिंग अधीक्षक के पद पर हुई विजि अवस्थी की नियुक्ति को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि चयन प्रक्रिया के बीच नियमों में बदलाव कर अतिरिक्त अंक नहीं दिए जा सकते।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/datia-story-7e33220a
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteदतिया मेडिकल कॉलेज में नर्सिंग अधीक्षक के पद पर हुई नियुक्ति को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने चयन प्रक्रिया में अनियमितता पाते हुए विजि अवस्थी की नियुक्ति को पूरी तरह से निरस्त कर दिया है। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteक्या था पूरा मामला और क्यों पहुंची याचिका कोर्ट Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइस मामले में याचिकाकर्ता सविता पांडेय ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और नियुक्ति प्रक्रिया को चुनौती दी थी। कॉलेज द्वारा जारी विज्ञापन में एमएससी नर्सिंग, बीएससी नर्सिंग या पोस्ट बेसिक बीएससी नर्सिंग जैसी योग्यताएं निर्धारित की गई थीं, लेकिन चयन के दौरान विजि अवस्थी को पीएचडी डिग्री के एवज में 10 अतिरिक्त अंक प्रदान किए गए थे। Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteअतिरिक्त अंक मिलने के बाद विजि अवस्थी के कुल 79 अंक हो गए थे, जिसके आधार पर 9 मई 2019 को उन्हें नर्सिंग अधीक्षक के पद पर नियुक्त कर दिया गया था। सुनवाई के दौरान अदालत में यह बात सामने आई कि मूल विज्ञापन में पीएचडी के लिए किसी भी तरह के अतिरिक्त अंक देने का कोई प्रावधान नहीं था। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading Quoteअंक कम होने से बदली पूरी मेरिट सूची Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteन्यायालय की समीक्षा में यह स्पष्ट हुआ कि यदि विजि अवस्थी के कुल 79 अंकों में से अवैध रूप से जोड़े गए 10 अंक हटा दिए जाएं, तो उनके अंक घटकर 69 रह जाएंगे। इसके विपरीत, याचिकाकर्ता सविता पांडेय ने अपनी निर्धारित योग्यताओं के दम पर 75 अंक प्राप्त किए थे। Add text below Add image below07Quote Paragraph Heading Subheading Quoteयदि अतिरिक्त अंक नहीं जोड़े जाते, तो सविता पांडेय मेरिट सूची में सबसे आगे रहतीं और चयन की हकदार होतीं। Add text below Add image below08Heading Paragraph Heading Subheading Quoteहाईकोर्ट की दो टूक: विज्ञापन के बाद नहीं बदल सकते नियम Add text below Add image below09Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteमामلا की सुनवाई करते हुए जस्टिस आनंद सिंह बहरावत की एकल पीठ ने सर्वोच्च न्यायालय के पुराने फैसलों का हवाला दिया। कोर्ट ने कहा कि भर्ती के लिए विज्ञापन जारी होने और चयन प्रक्रिया शुरू होने के पश्चात चयन के मापदंडों में बदलाव नहीं किया जा सकता है। Add text below Add image below10Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteअदालत ने यह भी साफ किया कि केवल उच्च शिक्षा या डिग्री होना ही किसी व्यक्ति को नियुक्ति का अधिकार नहीं देता, जब तक कि इसके लिए विज्ञापन में विशेष लाभ या अतिरिक्त अंकों का स्पष्ट प्रावधान न किया गया हो। Add text below Add image below11Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteहाईकोर्ट के इस कड़े फैसले के बाद तत्कालीन डीन डॉ. राजेश गौर के कार्यकाल में की गई यह विवादास्पद नियुक्ति अब समाप्त हो गई है, जिससे स्थानीय स्वास्थ्य और चिकित्सा हलकों में हलचल मच गई है। Add text below Add image below