Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryगणेश उत्सव के अंतिम दिन सेंवढ़ा में आस्था और लोक संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। विभिन्न पंडालों में लांगुरिया और ग्वाल-ग्वालनी के भजनों के बीच सनकुआं धाम पर प्रतिमाओं के विसर्जन का दौर जारी रहा।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/datia-story-56399070
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteसेंवढ़ा में गणेश उत्सव के अंतिम दिन आस्था, भक्ति और लोक संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। रतनगढ़ लै चल लांगुरिया की गूंज, ढोलक की थाप और गणपति के जयकारों के बीच शहर का माहौल पूरी तरह से भक्तिमय नजर आया। इस दौरान शहर के प्रमुख मार्गों से लेकर पंडालों तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteबजरिया मोहल्ले में गूंजे लांगुरिया और ग्वाल-ग्वालनी के भजन Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteशहर के बजरिया मोहल्ले में स्थित गणपति पंडाल पर गंठोली यादव की टीम ने विशेष प्रस्तुतियां दीं। कलाकारों ने माता रतनगढ़ वाली की आराधना से जुड़े लांगुरिया और लोक शैली में ग्वाल-ग्वालनी के संवाद व नोकझोंक को भजनों के माध्यम से प्रस्तुत किया। इस दौरान देर रात तक चले इस सांस्कृतिक आयोजन में श्रद्धालु भजनों की धुन पर झूमते नजर आए। लोकभाषा और गायन की इस शैली ने श्रोताओं को लंबे समय तक बांधे रखा। Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइस धार्मिक और सांस्कृतिक अनुष्ठान में श्यामकरण मिश्रा ने प्रसिद्ध सनकुआं धाम की महिमा का गुणगान किया। इसके अलावा कंदरपुरा, बेरछा, रेतीडांडा और सयानीपुरा से आई टीमों ने भी अपनी प्रस्तुतियां देकर कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर सहभागिता की। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading Quoteबुंदेली लोक परंपराओं की दिखी छटा Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteबुंदेलखंड अंचल में देवी आराधना के साथ लांगुरिया गायन की पुरानी परंपरा रही है, जिसमें देवी के प्रिय सेवक लांगुर की महिमा का बखान किया जाता है। स्थानीय लोक-साहित्य के अनुसार यहां पुरुषों द्वारा ढोलक और झांझ की थाप पर लांगुरिया गाने की विधा पीढ़ियों से चली आ रही है। गणेश उत्सव के अंतिम दिनों में इन पारंपरिक कलाओं का जीवंत रूप देखने को मिला। Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteनगर के विभिन्न पंडालों में विशेष पूजा-अर्चना, हवन और कीर्तन के दौर चले। सेंवढ़ा के अलावा लहार, गोहद और इंदरगढ़ तहसील के ग्रामीण इलाकों से भी बड़ी संख्या में गणेश प्रतिमाएं विसर्जन के लिए सनकुआं पहुंचीं। पिछले चार दिनों के भीतर यहां 200 से अधिक प्रतिमाओं का विसर्जन किया जा चुका है। Add text below Add image below08Heading Paragraph Heading Subheading Quoteभव्य शोभायात्रा और विसर्जन को लेकर उत्साह Add text below Add image below09Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteअनंत चतुर्दशी के अवसर पर सुबह से ही झांकियों और प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए निकलने का सिलसिला शुरू हो गया है। बजरिया मोहल्ला, बड़े बाबा मंदिर के पास स्थापित 'सेंवढ़ा के राजा', हनुमान चौराहा और दीक्षित मोहल्ला के पंडालों में क्षेत्र की सबसे विशाल प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं, जिनके दर्शन के लिए भारी भीड़ उमड़ रही है। Add text below Add image below10Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइन प्रमुख पंडालों की प्रतिमाओं के विसर्जन को लेकर युवा समितियों में विशेष उत्साह और प्रतिस्पर्धा का माहौल भी देखा जा रहा है। ढोल-नगाड़ों और आकर्षक झांकियों के साथ निकलने वाली इन विशाल शोभायात्राओं के मद्देनजर पूरे नगर में सुरक्षा और व्यवस्था के बीच उत्सव का माहौल चरम पर है। Add text below Add image below