Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryदतिया में रियासतकालीन परंपरा से लेकर आधुनिक विजयदशमी तक के सफर में कई बदलाव आए हैं। आजादी से पहले जहां स्टेडियम ग्राउंड में पड़े का वध किया जाता था, वहीं अब विशाल आतिशबाजी के बीच भव्य पुतला दहन किया जाता है।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/datia-69-9ea6ab13
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteग्वालियर-चंबल अंचल के ऐतिहासिक नगर दतिया में विजयदशमी के पर्व का स्वरूप समय के साथ काफी बदल चुका है। आज से करीब 80 साल पहले यानी वर्ष 1946 तक यहां दशहरा का पर्व रावण वध से नहीं, बल्कि एक अलग परंपरा के तहत मनाया जाता था। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteरियासतकाल में स्टेडियम ग्राउंड पर होती थी प्रथा Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइतिहासकारों के मुताबिक, महाराज गोविंद सिंह जूदेव के शासनकाल में दतिया का दशहरा आसपास की रियासतों में काफी प्रसिद्ध था। उस समय शहर के स्टेडियम ग्राउंड में भैंस के पड़े का वध कर पर्व मनाया जाता था, जिसकी गवाही यहां का पुराना इतिहास देता है। Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteमहाराज के शासनकाल में दो बार दशहरा मनाया जाता था। नवरात्रि की नवमी तिथि को किले के अंदर 16 सीढ़ियों पर छोटा दशहरा मनाया जाता था, जहां नगरवासी लोक नृत्य, खेल तमाशे और मल्लयुद्ध का प्रदर्शन करते हुए शस्त्रों की पूजा करते थे। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading Quoteशाही सवारी और पड़ा वध की परंपरा Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteमुख्य दशहरा के दिन दतिया नरेश की शाही सवारी किले से निकलकर शहर के मुख्य बाजारों से गुजरते हुए सुरइयन मैदान तक पहुंचती थी। इस भव्य चल समारोह में दतिया नरेश महाराज गोविंद सिंह हाथी पर सवार होकर चलते थे। Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइतिहासकार विनोद मिश्र के अनुसार, सुरइयन मैदान पहुंचने पर महाराज एक गुंबद पर बैठते थे और आचार्यों द्वारा विधि-विधान से पड़े की पूजा के बाद उसका वध किया जाता था। हालांकि, वर्ष 1947 में देश स्वतंत्र होने के बाद इस प्रथा को पूरी तरह बंद कर दिया गया। Add text below Add image below08Heading Paragraph Heading Subheading Quoteहाथ ठेले से शुरू हुआ रावण दहन अब 69 फीट तक पहुंचा Add text below Add image below09Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteआजादी मिलने के बाद परंपरा में बदलाव आया और सादे चल समारोह के तहत मात्र पांच फीट ऊंचे रावण के पुतले को हाथ ठेले पर रखकर स्टेडियम ले जाया जाने लगा। वक्त के साथ पुतले का आकार बढ़ता गया और अब यह ऊंचाई बढ़कर 69 फीट तक पहुंच चुकी है। Add text below Add image below10Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteस्थानीय स्तर पर मनाए जाने वाले इस पर्व में अब आधुनिकता का भी असर देखा जा सकता है। पहले जहां लोग घर-घर जाकर पर्व की बधाइयां देते थे, वहीं अब शुभकामनाओं का आदान-प्रदान ज्यादातर डिजिटल माध्यमों और सोशल मीडिया के जरिए ही हो जाता है। Add text below Add image below11Heading Paragraph Heading Subheading Quoteआज निकलेगा भव्य चल समारोह और होगा पुतला दहन Add text below Add image below12Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteमंगलवार को निकलने वाले चल समारोह में श्रीराम राजा, माता जानकी, लक्ष्मण, हनुमान जी और भगवान भोलेनाथ समेत रामायण के अन्य पात्रों की सुंदर झांकियां बाजार से भ्रमण करेंगी। शाम छह बजे शुरू होने वाला यह जुलूस बड़ा बाजार, किलाचौक, बिहारी जी मंदिर, गांधी रोड और राजगढ़ चौराहा होते हुए स्टेडियम पहुंचेगा। Add text below Add image below13Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteस्टेडियम परिसर में भगवान श्रीराम और रावण के बीच प्रतीकात्मक युद्ध होगा, जिसके उपरांत भव्य आतिशबाजी की जाएगी। रात ठीक साढ़े नौ बजे स्टेडियम ग्राउंड में 69 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया जाएगा। Add text below Add image below