Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryडबरा में जमीयत उलमा ए हिंद के स्थानीय संगठन ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के प्रस्तावित प्रारूप का कड़ा विरोध किया है। संगठन के सदस्यों ने राष्ट्रपति के नाम अनुविभागीय अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर मौलिक अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा की गुहार लगाई है।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/dabra-story-6352045e
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteग्वालियर-चंबल आंचल के डबरा में जमीयत उलमा ए हिंद की स्थानीय इकाई ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के प्रस्तावित मसौदे के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की है। संगठन से जुड़े पदाधिकारियों और सदस्यों ने राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारी को सौंपा, जिसमें यूसीसी के कई प्रावधानों पर गहरी आपत्ति जताई गई है। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteमौलिक अधिकारों और सांस्कृतिक विविधता की सुरक्षा की मांग Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteप्रस्तुत किए गए ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि यह विरोध प्रदर्शन मुस्लिम समाज, जमीयत उलेमा मध्य प्रदेश और क्षेत्र के कई चिंतित नागरिकों की ओर से किया जा रहा है। संगठन का मुख्य उद्देश्य भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों, धार्मिक स्वतंत्रता, सांस्कृतिक विविधता और सामाजिक सद्भाव को सुरक्षित रखना है। साथ ही यह भी साफ किया गया कि इस कदम का मकसद किसी भी धर्म या समुदाय का विरोध करना नहीं है, बल्कि संवैधानिक मूल्यों का संरक्षण करना है। Add text below Add image below04Heading Paragraph Heading Subheading Quoteशरीयत कानून और समानता के सिद्धांत का दिया हवाला Add text below Add image below05Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteसंगठन ने अपने ज्ञापन में संविधान के अनुच्छेद 44 और अनुच्छेद 37 का जिक्र करते हुए कहा कि नीति-निर्देशक तत्व न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं, इसलिए कानून निर्माण के दौरान मौलिक अधिकारों को हमेशा सर्वोपरि रखा जाना चाहिए। इसके अलावा मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) की कानूनी मान्यता का हवाला देते हुए विवाह, तलाक और उत्तराधिकार जैसे मामलों में इसे धार्मिक आस्था का अहम हिस्सा बताया गया। संगठन ने सवाल उठाया कि जब जनजातियों को परंपराओं के आधार पर छूट मिल सकती है, तो मुस्लिम समाज की व्यक्तिगत विधियों के साथ अलग रुख क्यों अपनाया जा रहा है। Add text below Add image below06Heading Paragraph Heading Subheading Quoteविधि आयोग की रिपोर्ट और व्यापक जन-परामर्श की मांग Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteज्ञापन के माध्यम से 21वें विधि आयोग की वर्ष 2018 की रिपोर्ट का भी उल्लेख किया गया, जिसमें व्यक्तिगत कानूनों में सुधार लाने को बेहतर विकल्प बताया गया था। जमीयत ने इस बात पर भी चिंता जताई कि यूसीसी को लेकर पर्याप्त जन-परामर्श नहीं किया गया है। संगठन ने मांग की है कि इस संवेदनशील विषय पर धार्मिक संगठनों, विधि विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और नागरिक समाज के साथ खुला संवाद किया जाए। Add text below Add image below08Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteकार्यक्रम के दौरान ज्ञापन सौंपने वालों में राजा अज़हर अली, उजमा एहमद, इब्राहिम खान, इस्माइल खान, इरफान अली और अनीष मोहम्मद समेत संगठन के तमाम गणमान्य सदस्य मौजूद रहे। Add text below Add image below