Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryगोहद के गायत्री मंदिर के पास बैसली नदी किनारे स्थित विश्राम घाट के जीर्णोद्धार से नई मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। घाट पर दीवार बनने और सीढ़ियां न होने से लोगों को तर्पण के लिए दूसरे स्थान पर जाना पड़ रहा है।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/bhind-story-ee844014
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Heading Paragraph Heading Subheading Quoteगोहद में विश्राम घाट का जीर्णोद्धार बना जी का जंजाल Add text below Add image below02Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteभिंड जिले के गोहद नगर में नागरिकों की सुविधा के लिए कराए जा रहे विश्राम घाट के जीर्णोद्धार का कार्य अब आमजन के लिए परेशानी का सबब बन गया है। गायत्री मंदिर के समीप बैसली नदी के तट पर स्थित इस प्राचीन विश्राम घाट पर करीब 15 फीट ऊंची दीवार का निर्माण कर दिया गया है। इस स्थिति के कारण घाट परिसर से सीधे नदी के जलस्तर तक पहुंचने का कोई मार्ग नहीं बचा है। Add text below Add image below03Heading Paragraph Heading Subheading Quoteसीढ़ियां न होने से पितृ पक्ष में रुकी परंपरा Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteस्थानीय नागरिकों ने बताया कि इससे पहले विश्राम घाट के पास नदी तक उतरने के लिए पक्की सीढ़ियां बनी हुई थीं, जिनकी मदद से लोग आसानी से जलस्त्रोत तक पहुंचकर स्नान, पूजन और तर्पण के अनुष्ठान संपन्न करते थे। हालिया सुंदरीकरण और निर्माण कार्य के दौरान वहां चबूतरा तो बना दिया गया, किंतु नदी तक उतरने के मार्ग को पूरी तरह अनदेखा कर दिया गया। रास्ते के अभाव में विशेषकर बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading Quoteश्रद्धालुओं को दूसरी तरफ जाने की मजबूरी Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteमौजूदा समय में पितृ पक्ष चलने के कारण गोहद शहर के अलावा आसपास के ग्रामीण इलाकों से भी भारी संख्या में लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण करने विश्राम घाट पहुंच रहे हैं। घाट से नदी तक सीधी पहुंच न होने के कारण इन श्रद्धालुओं को मजबूरन नदी के दूसरे तट की ओर रुख करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि घाट पर जल्द से जल्द सीढ़ियों का निर्माण कराया जाए। Add text below Add image below07Heading Paragraph Heading Subheading Quoteनगर पालिका सीएमओ का बयान और गुणवत्ता पर सवाल Add text below Add image below08Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइस पूरे मामले पर गोहद के सीएमओ सोनू परिहार ने स्पष्ट किया है कि बैसली नदी के विश्राम घाट का जीर्णोद्धार कार्य प्रगति पर है तथा स्थानीय नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए नदी तक उतरने के लिए आगे और सीढ़ियों का निर्माण कराया जाएगा। दूसरी ओर, नागरिकों ने इस निर्माण कार्य की क्वालिटी पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं और आरोप लगाया है कि मौके पर हो रहा काम तय मानकों के मुताबिक नहीं है, जिसकी शिकायत सीएमओ और एसडीएम को पंचनामा सौंपकर की जा चुकी है। Add text below Add image below