Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryग्वालियर उच्च न्यायालय ने भिंड जिले की एक लापता युवती के मामले में पुलिस की जांच पर गंभीर नाराजगी व्यक्त की है। न्यायालय ने मामले की धीमी प्रगति और लापरवाही को देखते हुए जांच अब अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) स्तर के अधिकारी को सौंपने का आदेश दिया है।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/bhind-story-c2397b36
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteग्वालियर उच्च न्यायालय ने लापता व्यक्तियों, विशेषकर युवतियों की तलाश में मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा बरती जा रही गंभीरता की कमी पर कड़ी टिप्पणी की है। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान, न्यायालय ने कहा कि गुमशुदगी के मामलों की जांच अक्सर ऐसे अधिकारियों को सौंपी जाती है जो प्रभावी नहीं होते, जिसके परिणामस्वरूप बाद में जांच अधिकारी बदलने पड़ते हैं। Add text below Add image below02Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteयह मामला भिंड जिले के आलमपुर थाना क्षेत्र से जुड़ा है। तौफीक राइन नामक व्यक्ति ने अपनी बहन की गुमशुदगी को लेकर उच्च न्यायालय में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की है। उनकी बहन अलीशा बीते 25 मार्च की रात से लापता है, जिसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट उनके पिता ने 26 मार्च को दर्ज कराई थी। याचिका में यह बताया गया कि लगभग चार महीने बीत जाने के बाद भी पुलिस युवती को ढूंढने में कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पाई है। Add text below Add image below03Heading Paragraph Heading Subheading Quoteजांच अधिकारी की कार्यप्रणाली पर सवाल Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteन्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ ने पाया कि वर्तमान जांच अधिकारी, एएसआई ओंकार सिंह तोमर, मामले की प्रभावी जांच करने में पूरी तरह से असफल रहे हैं। वे न्यायालय द्वारा पूछे गए सवालों का कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके। उन्होंने केवल यह जानकारी दी कि इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया खातों की जांच की गई थी, लेकिन युवती का कोई सुराग नहीं मिला। केस डायरी के अवलोकन से भी यह स्पष्ट हुआ कि उन्होंने केवल आसपास के लोगों को युवती की तस्वीर दिखाकर जांच की औपचारिकता पूरी की थी। न्यायालय ने तत्काल प्रभाव से मौजूदा जांच अधिकारी को बदलने का आदेश दिया। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading Quoteपुलिस अधीक्षक की भूमिका पर भी प्रश्नचिह्न Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteउच्च न्यायालय ने इस बात पर भी टिप्पणी की कि पुलिस अधीक्षक (एसपी) जांच अधिकारी के चयन में लापरवाही बरत रहे हैं। वे यह सुनिश्चित किए बिना ही जांच की जिम्मेदारी सौंप देते हैं कि संबंधित अधिकारी प्रभावी ढंग से कार्य करने में सक्षम है या नहीं। न्यायालय ने एसपी को एक हलफनामा दाखिल कर यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्या उन्होंने कभी इस मामले की केस डायरी की समीक्षा की थी, क्या उन्होंने जांच अधिकारी को कोई निर्देश दिए थे, और अब तक की गई जांच को क्या वे प्रभावी मानते हैं। Add text below Add image below07Heading Paragraph Heading Subheading Quoteएएसपी स्तर के अधिकारी को जांच का जिम्मा Add text below Add image below08Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteउच्च न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस मामले की जांच अब ऐसे अधिकारी को सौंपी जाए, जिसका पद अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) से कम न हो। इसके साथ ही, नए जांच अधिकारी को लापता युवती की तलाश के लिए सभी संभावित और आवश्यक प्रयास करने होंगे ताकि जल्द से जल्द उसका पता लगाया जा सके। Add text below Add image below