Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryबेटे की गंभीर बीमारी दूर होने पर एक पिता ने दंदरौआ हनुमान धाम तक दंडवत यात्रा का संकल्प लिया है। वह उत्तर प्रदेश के विजयपुर से कीलों की शैया पर लेटकर अपनी आस्था के साथ यह कठिन सफर तय कर रहा है।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/bhind-story-b2220288
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteग्वालियर-चंबल अंचल के भिंड जिले से आस्था और समर्पण का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक पिता अपने आठ साल के बेटे की गंभीर बीमारी से निजात मिलने के बाद, अपनी मान्यता को पूरा करने के लिए अत्यंत कठिन परीक्षा दे रहा है। वह उत्तर प्रदेश के इटावा जिले स्थित विजयपुर गांव से दंदरौआ हनुमान धाम तक कीलों की शैया पर लेटकर दंडवत यात्रा कर रहा है। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteछह माह की उम्र में पता चली थी बीमारी Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteधर्मेंद्र नामक इस पिता ने बताया कि जब उसका बेटा मात्र छह माह का था, तब डॉक्टरों ने जांच के दौरान उसके दिमाग की नस में ब्लड क्लॉट यानी रक्त के थक्के जमने की पुष्टि की थी। इस वजह से बच्चा लगातार बीमार रहता था। चिंता में डूबे धर्मेंद्र ने बेटे के इलाज के लिए दिल्ली सहित देश के कई बड़े चिकित्सा संस्थानों के चक्कर काटे और लगातार जांच कराई। Add text below Add image below04Heading Paragraph Heading Subheading Quoteदंदरौआ धाम में लगाई थी विशेष अर्जी Add text below Add image below05Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइलाज के दौरान लगभग चार महीने पहले धर्मेंद्र अपने बीमार बेटे को लेकर प्रसिद्ध दंदरौआ धाम पहुंचा। वहां उसने हनुमान जी महाराज के दरबार में अर्जी लगाई और मनोकामना मांगी कि यदि उसका बेटा पूरी तरह स्वस्थ हो जाता है, तो वह दंडवत करते हुए धाम तक पहुंचेगा। इसके कुछ समय बाद ही बेटे की स्वास्थ्य स्थिति में चमत्कारी सुधार दिखने लगा। Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteधर्मेंद्र के अनुसार, मन्नत मांगने के महज पंद्रह दिन बाद जब वह बेटे को दिखाने दिल्ली के डॉक्टर के पास गया, तो उसकी जांच रिपोर्ट सामान्य आई। इसके बाद तीन महीने तक हुई लगातार जांचों में भी यही स्थिति रही। करीब पंद्रह दिन पहले डॉक्टर ने स्पष्ट कह दिया कि अब बच्चे को दिखाने के लिए दोबारा लाने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि वह पूरी तरह सामान्य है। Add text below Add image below07Heading Paragraph Heading Subheading Quote12 सितंबर से शुरू की कठिन दंडवत यात्रा Add text below Add image below08Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteबेटे के स्वस्थ होने का भरोसा मिलते ही धर्मेंद्र ने अपनी मनौती पूरी करने का निर्णय लिया। उसने गत 12 सितंबर को अपने गृह ग्राम विजयपुर से दंदरौआ धाम के लिए दंडवत यात्रा का शुभारंभ किया। इस यात्रा को लगभग 25 दिनों में पूरा करने का उसका संकल्प है। इस कठिन मार्ग में वह गर्म डामर सड़क, पथरीले रास्तों और बारिश के बीच कीलों की शैया पर लेटकर आगे बढ़ रहा है और यात्रा के 11वें दिन वह भिंड जिले की सीमा में पहुंच गया है। Add text below Add image below09Quote Paragraph Heading Subheading Quoteपिछले आठ साल से बेटे की बीमारी को लेकर परेशान था। अब तीन महीने से रिपोर्ट सामान्य आ रही है और डॉक्टर ने भी आने से मना कर दिया है। मैंने दंदरौआ हनुमान जी से जो मन्नत मांगी थी, उसे पूरा करने के लिए अब दंडवत करते हुए उनके दरबार जा रहा हूं। Add text below Add image below