Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryशासकीय एमजेएस महाविद्यालय में प्राचार्य पर बस संचालन और स्टेशनरी खरीदी समेत कई मामलों में वित्तीय अनियमितता के आरोप लगे हैं। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने इन मामलों की उच्चस्तरीय जांच और सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया है।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/bhind-story-a176b218
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteभिंड के शासकीय एमजेएस महाविद्यालय में प्रशासनिक व्यवस्थाओं और वित्तीय मामलों को लेकर तनाव की स्थिति बन गई है। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राम अवधेश शर्मा के खिलाफ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के बैनर तले छात्र और कार्यकर्ता मुखर हो गए हैं। संगठन से जुड़े युवाओं ने कॉलेज परिसर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है और प्राचार्य पर गंभीर वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप लगाए हैं। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteबस संचालन और स्टेशनरी खरीदी पर उठे सवाल Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteएबीवीपी नेताओं सुमित दीक्षित और रिषेंद्र सिंह राजावत का कहना है कि सत्र 2024-25 के दौरान कॉलेज में बस संचालन के लिए 4 हजार रुपए प्रतिदिन के हिसाब से निविदा मंजूर की गई थी। इसके बाद अगले सत्र में इसी बस के वास्ते 3400 रुपए प्रतिदिन की दर से भुगतान किए जाने का दावा किया गया है। परिषद ने इस वित्तीय अंतर को संदिग्ध मानते हुए इसकी विस्तृत जांच की मांग की है। Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइसके अलावा सितंबर 2025 में स्टेशनरी खरीदने के लिए शुरू की गई टेंडर प्रक्रिया को बीच में ही रद्द कर दिया गया था। आरोप है कि इसके बाद एक निजी फर्म से सीधे तौर पर लाखों रुपए की स्टेशनरी खरीद ली गई, जिसमें भंडार क्रय नियमों को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading Quoteबिना अनुमति सामग्री खरीद और खेल मद में गड़बड़ी का दावा Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteछात्र संगठन द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में जिक्र किया गया है कि तत्कालीन कलेक्टर के तबादले के पश्चात करीब 5 लाख रुपए की विभिन्न सामग्री खरीदी गई थी। परिषद का आरोप है कि यह पूरी खरीदारी वर्तमान पदेन जनभागीदारी अध्यक्ष की बिना किसी अनुमति के की गई, जिसके सभी दस्तावेजों की सूक्ष्म जांच होनी चाहिए। Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteछात्रों ने वर्ष 2024-25 के दौरान खेल मद से जुड़े 8.62 लाख रुपए अलग-अलग चेकों के माध्यम से सीधे निजी खातों में ट्रांसफर करने का भी आरोप लगाया है। एबीवीपी का कहना है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से नियमों के विरुद्ध है और इससे जुड़े बैंक लेन-देन की जांच कराई जानी चाहिए। पीएम श्री महाविद्यालय के विकास और मरम्मत के लिए आवंटित 40 लाख रुपए के फंड के सही उपयोग को लेकर भी सवाल खड़े किए गए हैं। Add text below Add image below08Heading Paragraph Heading Subheading Quoteपेड़ों की कटाई और विकास राशि के दुरुपयोग का आरोप Add text below Add image below09Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteधरने पर बैठे छात्रों ने कॉलेज परिसर में बिना किसी सक्षम अधिकारी की अनुमति के हरे पेड़ कटवाने का संगीन आरोप भी लगाया है। उनका दावा है कि लगभग 25 क्विंटल लकड़ी बाजार में बेच दी गई, लेकिन उसकी बिक्री से मिली धनराशि को कॉलेज के आधिकारिक कोष में जमा नहीं कराया गया है। Add text below Add image below10Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइसके साथ ही पुस्तकालय के विकास के लिए मिले 14 लाख रुपए और प्रयोगशाला के उन्नयन के लिए प्राप्त 15 लाख रुपए की राशि के उपयोग को लेकर भी निविदा प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। छात्रों का आरोप है कि उचित प्रक्रिया के अभाव में विद्यार्थियों को इन योजनाओं का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया है। इन सभी बिंदुओं को प्रमुखता से उठाते हुए उच्च शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन प्रेषित किया गया है। Add text below Add image below