Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryभिंड में पदस्थ फॉरेस्ट एसडीओ रामकुमार पर सेवा रिकॉर्ड में संतानों की जानकारी छिपाने का गंभीर आरोप लगा है। सत्रह सितंबर को की गई इस शिकायत पर पंद्रह दिन बीत जाने के बाद भी विभागीय स्तर पर जांच अधिकारी तय नहीं हो सका है।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/bhind-story-a049d9db
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteग्वालियर-चंबल अंचल के भिंड जिले में वन विभाग के एक बड़े अधिकारी के खिलाफ आई शिकायत पर पंद्रह दिन से अधिक समय गुजर जाने के बाद भी प्रशासनिक सुस्ती बनी हुई है। स्थानीय स्तर पर की गई इस शिकायत की फाइल अधिकारियों के बीच ही उलझकर रह गई है। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteसेवा रिकॉर्ड में संतानों की जानकारी छिपाने का है मामला Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteभिंड निवासी अनिल कुमार ने बीते सत्रह सितंबर को डीएफओ भिंड और सीसीएफ ग्वालियर को लिखित शिकायत सौंपी थी। इसमें फॉरेस्ट एसडीओ रामकुमार पर यह आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अपने शासकीय सेवा रिकॉर्ड में संतान संबंधी पूरी जानकारी नहीं दी है। Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteशिकायतकर्ता के अनुसार, अधिकारी के सेवा रिकॉर्ड में केवल शिवांगी अरोलीया का जिक्र मिलता है। वहीं, परिवार आईडी और अन्य आधिकारिक दस्तावेजों में हिमांशी अरोलीया और वान्या अरोलीया समेत कुल पांच संतानों के होने का दावा किया गया है। शिकायतकर्ता ने इसके समर्थन में कुछ दस्तावेज भी पेश किए हैं। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading Quoteकार्यालयों के चक्कर काट रही फाइल, जांच अधिकारी तय नहीं Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइस पूरे मामले में जब डीएफओ बीआर सरसाम से पक्ष जाना गया, तो उनका कहना था कि इस प्रकरण में जांच के संबंध में सीसीएफ ग्वालियर को पत्र भेजा जा चुका है। दूसरी ओर, जब सीसीएफ ललित भारती से इस बारे में बात की गई, तो उनका कहना था कि उन्हें इस तरह के किसी भी पत्र के आने की कोई जानकारी नहीं है। Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteदोनों वरिष्ठ अधिकारियों के अलग-अलग बयानों से यह साफ हो गया है कि सत्रह सितंबर को आवेदन मिलने के बावजूद पंद्रह दिन बीतने पर भी अब तक कोई जांच दल या जांच अधिकारी नियुक्त नहीं किया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि मामले को दबाने के लिए औपचारिकताएं पूरी नहीं की जा रही हैं। Add text below Add image below08Heading Paragraph Heading Subheading Quoteभोपाल तक मामले को ले जाने की चेतावनी Add text below Add image below09Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteशिकायतकर्ता अनिल कुमार ने दोटूक कहा है कि उनके पास इस मामले से जुड़े पुख्ता सबूत और दस्तावेज मौजूद हैं। यदि स्थानीय स्तर पर विभाग ने जल्द निष्पक्ष जांच शुरू नहीं की, तो वह इस शिकायत को भोपाल स्थित उच्च स्तर के अधिकारियों तक पहुंचाएंगे। Add text below Add image below10Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteउल्लेखनीय है कि वन विभाग में शिकायतों के लंबित रहने का यह कोई पहला वाकया नहीं है। इससे पहले खुद एसडीओ रामकुमार द्वारा फॉरेस्ट रेंजर कृतिका शुक्ला के खिलाफ की गई एक शिकायत भी विभाग में विचाराधीन पड़ी हुई है। Add text below Add image below