Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryसिंध नदी में अवैध रूप से चल रहे मशीनीकृत रेत उत्खनन पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने सख्त रुख अपनाया है। पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह की याचिका पर एनजीटी ने तीन सदस्यीय संयुक्त समिति का गठन कर जवाब तलब किया है।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/bhind-story-7e8819d7
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteराष्ट्रीय हरित अधिकरण यानी एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच ने भिंड और दतिया जिलों से गुजरने वाली सिंध नदी में धड़ल्ले से चल रहे अवैध रेत उत्खनन के मामले में कड़ा संज्ञान लिया है। यह कार्रवाई प्रदेश के पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह की ओर से दायर की गई याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई है। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteभिंड और दतिया के गांवों में हो रहा मनमाने ढंग से खनन Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteयाचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं ने ट्रिब्यूनल के समक्ष तथ्यात्मक जानकारी रखी कि भिंड जिले के 18 और दतिया जिले के 6 गांवों की सीमा में सिंध नदी से भारी भरकम अर्थ-मूविंग मशीनों और सक्शन-ड्रेजिंग नौकाओं के जरिए अवैध रूप से रेत का दोहन किया जा रहा है। इस पूरी प्रक्रिया में नियमों को ताक पर रखा गया है। Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteसामने आया है कि यह सारा अवैध उत्खनन बिना किसी वैध पर्यावरण स्वीकृति यानी ईसी और जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट के धड़ल्ले से अंजाम दिया जा रहा है। इसके अलावा, निकाली जा रही रेत को बिना वैध ट्रांजिट परमिट के मध्य प्रदेश के साथ-साथ पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में भी खपाया जा रहा है। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading Quoteचंबल घड़ियाल अभयारण्य की जैव विविधता पर मंडराया गंभीर संकट Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteयाचिका में इस बात पर भी विशेष जोर दिया गया है कि सिंध नदी का यह क्षेत्र राष्ट्रीय चंबल वन्यजीव घड़ियाल अभयारण्य का एक बेहद संवेदनशील और पारिस्थितिक रूप से महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह पूरा इलाका घड़ियालों, मगरमच्छों, इंडियन फ्लैपशेल कछुओं और तमाम दुर्लभ प्रवासी पक्षियों का मुख्य प्रजनन स्थल माना जाता है। Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteशिकायत में बताया गया कि भारी मशीनों के इस्तेमाल से नदी के प्राकृतिक जल प्रवाह पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। साथ ही, जलीय जीवों का जीवन संकट में पड़ गया है, जिससे पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है। Add text below Add image below08Heading Paragraph Heading Subheading Quoteसमिति को सौंपा गया स्थलीय निरीक्षण का जिम्मा Add text below Add image below09Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइस गंभीर मामले पर संज्ञान लेते हुए एनजीटी की न्यायिक बेंच ने एक तीन सदस्यीय संयुक्त समिति का गठन किया है। इस समिति में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, मध्य प्रदेश पर्यावरण विभाग और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधि शामिल किए गए हैं, जिसमें प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोडल एजेंसी बनाया गया है। Add text below Add image below10Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteएनजीटी ने इस समिति को निर्देश दिए हैं कि वह जल्द से जल्द प्रभावित क्षेत्रों का प्रत्यक्ष रूप से निरीक्षण करे। इसके बाद छह सप्ताह के भीतर अपनी विस्तृत तथ्यात्मक और की गई कार्रवाई की रिपोर्ट ट्रिब्यूनल के समक्ष पेश करनी होगी। Add text below Add image below11Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइसके अतिरिक्त, एनजीटी ने मध्य प्रदेश शासन समेत सभी संबंधित प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं। इस पूरे प्रकरण की अगली सुनवाई अब आगामी 7 अक्टूबर 2026 को तय की गई है। Add text below Add image below