Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryसावन के दूसरे सोमवार पर भिंड जिले के आलमपुर स्थित प्राचीन हरिहरेश्वर मंदिर में सुबह से ही शिव भक्तों का तांता लगा रहा। इस ऐतिहासिक मंदिर का निर्माण देवी अहिल्याबाई होलकर द्वारा कराया गया था, जहां दूर-दूर से श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंचे।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/bhind-story-667227ba
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Heading Paragraph Heading Subheading Quoteसावन सोमवार पर गूंजा शिवमय वातावरण Add text below Add image below02Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteभिंड जिले के अंतर्गत आने वाले आलमपुर कस्बे के प्रसिद्ध हरिहरेश्वर मंदिर में सावन माह के दूसरे सोमवार को भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। सुबह होते ही मंदिर परिसर 'ॐ नमः शिवाय' और 'बम बम भोले' के गूंजते जयकारों से पूरी तरह भक्तिमय हो गया। Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteपवित्र दिन पर भक्तों ने भगवान शिव के दर्शन कर उनका जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक किया। इसके साथ ही पूजन सामग्री में बेलपत्र, धतूरा और पुष्प अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की गई। Add text below Add image below04Heading Paragraph Heading Subheading Quoteदेवी अहिल्याबाई होलकर से जुड़ा है इतिहास Add text below Add image below05Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteयह धार्मिक स्थल अपने गौरवशाली इतिहास के लिए जाना जाता है। इतिहास के अनुसार, वर्ष 1766 में देवी अहिल्याबाई होलकर ने अपने ससुर मल्हारराव होलकर की याद में इस मंदिर का निर्माण करवाया था, क्योंकि मल्हारराव होलकर का देहांत इसी क्षेत्र के समीप हुआ था। Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteनिर्माण कार्य पूरा होने के पश्चात अहिल्याबाई ने यहां शिव परिवार की स्थापना की और बाद में आदिशक्ति माता की प्रतिमा भी स्थापित करवाई थी, जो आज भी क्षेत्र की आस्था का बड़ा केंद्र है। Add text below Add image below07Heading Paragraph Heading Subheading Quoteबिना नंदी के विराजे हैं भोलेनाथ Add text below Add image below08Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteहरिहरेश्वर मंदिर की एक खास विशेषता यह है कि यहां भगवान शिव के सामने नंदी महाराज की प्रतिमा स्थापित नहीं है। ऐसी गहरी मान्यता है कि इस मंदिर में देवाधिदेव महादेव अपने भक्तों की अरदास सीधे और बिना किसी माध्यम के सुनते हैं। Add text below Add image below09Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteन सिर्फ सावन बल्कि नवरात्रि के पावन दिनों में भी यहां विशेष धार्मिक आयोजनों और अनुष्ठानों का सिलसिला चलता रहता है, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय लोग हिस्सा लेते हैं। Add text below Add image below10Heading Paragraph Heading Subheading Quoteअंचल के अन्य शिव धामों में भी रही खासी चहल-पहल Add text below Add image below11Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteसोमवार के इस पावन अवसर पर भिंड अंचल के बाकी प्रमुख शिवालयों में भी आस्था का सैलाब देखने को मिला। लहार स्थित वनखण्डेश्वर महादेव मंदिर, सौंसरा के प्राचीन शिव मंदिर और रावतपुरा धाम में मौजूद 85 फीट ऊंची विशाल शिव प्रतिमा के दर्शन के लिए भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। Add text below Add image below