Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryभिंड जिले के एक साधारण किसान परिवार के बेटे पवन कुमार ने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की है। विषम परिस्थितियों और आर्थिक तंगी को मात देते हुए उन्होंने समाजशास्त्र विषय में सहायक प्राध्यापक पद पर चयन पाकर अंचल का मान बढ़ाया है।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/bhind-story-3c9f2b49
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Heading Paragraph Heading Subheading Quoteअभावों के बावजूद पिता ने बेटे को पढ़ाया Add text below Add image below02Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteलहार तहसील के रावतपुरा खुर्द गांव निवासी सत्येंद्र कुमार तिवारी के बेटे पवन कुमार ने अपनी मेहनत के दम पर बड़ा मुकाम हासिल किया है। परिवार की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर थी, लेकिन बेटे के सपनों को पूरा करने के लिए पिता ने रिश्तेदारों से कर्ज लेकर उसे इंदौर कोचिंग के लिए भेजा था। पवन ने एमपीपीएससी सहायक प्राध्यापक समाजशास्त्र परीक्षा-2024 में पूरे प्रदेश में सातवीं रैंक प्राप्त की है, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) में उनका पहला स्थान रहा है। Add text below Add image below03Heading Paragraph Heading Subheading Quoteस्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक का सफर Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteपवन की शुरुआती शिक्षा लहार के ही एक सरकारी स्कूल में पूरी हुई। इसके बाद उन्होंने लहार के शासकीय महाविद्यालय से बीएससी की डिग्री ली और आगे की पढ़ाई के लिए ग्वालियर आ गए। ग्वालियर के डॉ. भगवत सहाय शासकीय महाविद्यालय से समाजशास्त्र विषय में एमए करने के बाद उन्होंने प्रशासनिक और प्रतियोगी परीक्षाओं की राह पकड़ी। साल 2019 से उन्होंने पूरी शिद्दत के साथ एमपीपीएससी की तैयारी शुरू कर दी थी। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading Quoteअसफलताओं और कानूनी पेचीदगियों को दी मात Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteतैयारी के दौरान पवन को कई बाधाओं का सामना करना पड़ा। वर्ष 2020 में उन्होंने पहली बार एमपीपीएससी परीक्षा दी और साक्षात्कार तक पहुंचे, लेकिन आरक्षण और फॉर्मूले से जुड़े विवाद के कारण परिणाम अटक गया। इसके बाद वर्ष 2021 और 2022 की मुख्य परीक्षाओं में भी उन्हें निराशा हाथ लगी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी तैयारी लगातार जारी रखी। Add text below Add image below07Heading Paragraph Heading Subheading Quoteचेन्नई में नौकरी के साथ जारी रखी पढ़ाई Add text below Add image below08Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteकड़ी मेहनत के बल पर पवन ने यूजीसी-नेट परीक्षा पास की और कर्मचारी चयन आयोग के माध्यम से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण में उनका चयन चेन्नई में हो गया। सुबह नौ से शाम छह बजे तक नौकरी करने के बाद वे खुद अपने हाथ से खाना बनाते और रात को पढ़ाई में जुट जाते थे। कई बार वे भोर तक यानी रात के तीन-चार बजे तक पढ़ाई करते और कुछ घंटे सोकर फिर ड्यूटी पर चले जाते थे। Add text below Add image below09Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteअपनी इस जिद्दी मेहनत और अटूट लगन के बल पर आखिरकार पवन ने उच्च शिक्षा विभाग में सहायक प्राध्यापक के पद पर अपनी जगह सुनिश्चित कर ली। उनकी इस सफलता से उनके परिवार के साथ-साथ पूरे ग्रामीण इलाके और गवालियर-चंबल अंचल में खुशी का माहौल है। Add text below Add image below