Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryभिंड जिले के नदरौली गांव में बैसली नदी पर पुल और पक्की सड़क न होने से बारिश के दिनों में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। हालात यह हैं कि शिक्षकों और बच्चों को मटके और ट्यूब के सहारे या घंटों इंतजार करके नदी पार करनी पड़ती है।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/bhind-story-0444f7fa
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteभिंड जिला मुख्यालय से करीब पंद्रह-सोलह किलोमीटर दूर स्थित नदरौली गांव में बरसात के मौसम में आवागमन किसी बड़े संघर्ष से कम नहीं होता है। पक्की सड़क के अभाव में यहां के निवासियों को हर कदम पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। रास्ते में आने वाली बैसली नदी बारिश के दिनों में विकराल रूप धारण कर लेती है, जिससे पूरे क्षेत्र का संपर्क मुख्य मार्ग से कट जाता है। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteजान जोखिम में डालकर ट्यूब के सहारे नदी पार करने की मजबूरी Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteयह गांव बबेडी पंचायत के अंतर्गत आता है। यहां तक पहुंचने के लिए पराये के पुरा से आगे लगभग दो किलोमीटर तक खेतों की मेड़ों और कच्चे रास्तों से गुजरना पड़ता है। नदी का जलस्तर बढ़ने पर पैदल पार करना असंभव हो जाता है। ऐसी स्थिति में शिक्षक और ग्रामीण कभी-कभी ट्यूब या मटकों का सहारा लेते हैं, तो कई बार पानी का बहाव कम होने का घंटों इंतजार करना पड़ता है। Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteशिक्षकों का कहना है कि स्कूलों में ई-अटेंडेंस की व्यवस्था लागू होने के बाद से उनकी मुश्किलें और भी बढ़ गई हैं। उन्हें स्कूल परिसर से ही उपस्थिति दर्ज करानी होती है। ग्रामीण मदद के लिए ट्यूब लेकर आते हैं, तभी वे अपनी जान जोखिम में डालकर नदी पार कर पाते हैं। गांव में मोबाइल नेटवर्क की भी समस्या है, जिससे समय पर ऑनलाइन हाजिरी लगाने में भी दिक्कतें आती हैं। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading Quoteस्कूली बच्चों की पढ़ाई पर पड़ता है बुरा असर Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteनदरौली गांव की आबादी करीब नौ सौ से एक हजार के बीच है और यहां लगभग दो सौ घर हैं। गांव में प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं। प्राथमिक विद्यालय में लगभग चालीस और माध्यमिक विद्यालय में करीब तिरानवे विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteकक्षा आठवीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद करीब पचास से साठ छात्र-छात्राओं को आगे की शिक्षा के लिए बबेडी की तरफ जाना पड़ता है। बरसात के दिनों में माता-पिता बच्चों को उफनती नदी पार नहीं कराते, जिससे उनकी पढ़ाई लंबे समय तक बाधित रहती है। ग्रामीणों के अनुसार पूर्व मंत्री के पैतृक गांव होने के बावजूद आज तक यहां न तो सड़क बन पाई है और न ही पुल का निर्माण हो सका है। Add text below Add image below