Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryमध्य प्रदेश के भिंड जिले में पहूज नदी के किनारे बीहड़ के बीच एक प्राचीन देवी मंदिर है, जहाँ सदियों से माता के चेहरे के बजाय केवल पीठ की पूजा की जाती है। इस मंदिर से कई पुरानी मान्यताएं और ऐतिहासिक किस्से जुड़े हुए हैं।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/bhind-1500-78871cc0
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteग्वालियर-चंबल आंचल के भिंड जिले में एक ऐसा अनूठा देवी मंदिर स्थित है, जहाँ करीब 1500 साल पुरानी परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है। इस मंदिर में माता की मूल प्रतिमा एक कुंड के भीतर विराजी हुई है, लेकिन स्थानीय लोगों का मानना है कि आज तक किसी ने भी उनके मुख के दर्शन नहीं किए हैं। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteचार जिलों की सीमा और बीहड़ों का इतिहास Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteजिला मुख्यालय से लगभग 80 किलोमीटर की दूरी पर पहूज नदी के बीहड़ों के बीच यह पवित्र स्थल बसा हुआ है। भौगोलिक स्थिति के लिहाज से यह जगह चार जिलों की सीमाओं से घिरी है। यह भिंड जिले के अंतर्गत जरूर आता है, लेकिन यहाँ से थोड़ी ही दूरी पर उत्तर प्रदेश की सीमा शुरू हो जाती है। इसके अलावा, मध्य प्रदेश का दतिया और उत्तर प्रदेश के जालौन तथा झाँसी जिले की सीमाएं भी इसी इलाके से सटी हुई हैं। Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteबीहड़ का यह इलाका कभी कुख्यात डकैतों की शरणस्थली हुआ करता था। फूलन देवी, मलखान सिंह, लुक्का और नब्बे के दशक के चर्चित बागी हरीसिंह कुशवाह जैसे नाम इस क्षेत्र से जुड़े रहे हैं। बुजुर्गों का कहना है कि उस दौर में भी डकैत माता के प्रति अगाध श्रद्धा रखते थे और वे कभी मंदिर परिसर के अंदर उत्पाद नहीं मचाते थे। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading Quoteगाय की मौत से जुड़ी है 1500 साल पुरानी कथा Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteमंदिर के अतीत को लेकर स्थानीय स्तर पर एक प्रचलित कथा सुनाई जाती है। कहा जाता है कि लगभग 1500 साल पहले एक गाय रोज बीहड़ में बने चबूतरे पर एक पत्थर की प्रतिमा के ऊपर अपना सारा दूध अर्पित कर देती थी। जब पशुपालक ने इस रहस्य को जानने के लिए गाय का पीछा किया और घटना देखकर गुस्से में आकर कुल्हाड़ी से वार किया, तो गाय की मौके पर ही मौत हो गई। Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइस घटना के तुरंत बाद चमत्कारी रूप से माता की प्रतिमा उलट गई। उसी समय से प्रतिमा का मुख नीचे की ओर छिप गया और किसी को उसके दर्शन नहीं हुए। तभी से यहाँ आने वाले भक्तगण केवल पीठ की ही पूजा करते आ रहे हैं। Add text below Add image below08Heading Paragraph Heading Subheading Quoteकुंड में पानी भरने के बाद अब ऊपर से होती है पूजा Add text below Add image below09Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteपहले के समय में भक्त सीढ़ियों का उपयोग करके कुंड के अंदर उतरते थे और मूल प्रतिमा के पास जाकर पुष्प अर्पित करते थे। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों से कुंड में पानी भरा रहने के कारण अब बाहर से ही आराधना की जाती है। करीब पाँच साल पहले कुंड के ऊपरी हिस्से में एक अन्य प्रतिमा की स्थापना भी की गई है। इसके साथ ही परिसर में माँ आदिशक्ति शीतला माता की प्राचीन प्रतिमा भी स्थापित है, जिससे यहाँ तीन अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। Add text below Add image below