Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryशरद पूर्णिमा के पावन पर्व पर अशोकनगर के प्रसिद्ध करीला धाम में हजारों श्रद्धालुओं ने माता जानकी के दर्शन किए। इस दौरान मंदिर परिसर में दिनभर राई नृत्य और ढोल-नगाड़ों की गूंज बनी रही।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/ashoknagar-story-fbf46ffd
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Heading Paragraph Heading Subheading Quoteशरद पूर्णिमा पर करीला धाम में आस्था का महासंगम Add text below Add image below02Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteरविवार को शरद पूर्णिमा के अवसर पर प्रसिद्ध सिद्ध पीठ करीला धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। अलसुबह से ही माता जानकी के दर्शन और पूजन के लिए भक्तों का तांता लग गया था, जो देर शाम तक लगातार जारी रहा। दूर-दराज के इलाकों से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने माता के दरबार में मत् टेककर अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। Add text below Add image below03Heading Paragraph Heading Subheading Quoteमहर्षि वाल्मीकि की तपोभूमि और राई नृत्य की परंपरा Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteयह स्थान महर्षि वाल्मीकि की पावन तपोभूमि के रूप में विख्यात है, जहां माता जानकी अपने पुत्रों लव और कुश के साथ विराजमान हैं। इस क्षेत्र के लोगों की माता जानकी के प्रति अगाध श्रद्धा है। ऐसी मान्यता है कि माता जानकी राई नृत्य से बेहद प्रसन्न होती हैं, जिसके चलते मन्नत पूरी होने पर भक्त यहां नृत्यांगनाओं से राई नृत्य करवाते हैं। Add text below Add image below05Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteरविवार को करीला धाम का पूरा मंदिर परिसर पारंपरिक ढोल-नगाड़ों की थाप और राई नृत्य की गूंज से सराबोर नजर आया। मन्नत पूरी होने पर पहुंचे श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से अनुष्ठान पूरे किए। Add text below Add image below06Heading Paragraph Heading Subheading Quoteविभिन्न माध्यमों से पहुंचे श्रद्धालु Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteपूर्णिमा के खास अवसर पर करीला धाम की ओर जाने वाले सभी मार्गों पर दिनभर भक्तों का आना-जाना लगा रहा। श्रद्धालु बस, चार पहिया वाहन, ऑटो और दोपहिया वाहनों से करीला पहुंचे। इसके अलावा, आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग हाथों में माता की चुनरी और पूजन सामग्री लेकर पैदल यात्रा करते हुए दरबार में हाजिरी लगाने पहुंचे। Add text below Add image below