Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryपिपरई के प्याऊ ठाना में जारी श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कथावाचक बिहारी विदुर ने गोवर्धन पूजा और प्रकृति सम्मान का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण की लीलाओं से पर्यावरण को सहेजने की प्रेरणा मिलती है।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/ashoknagar-story-fbd75c56
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteअशोकनगर जिले के पिपरई क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले प्याऊ ठाना में इन दिनों संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा के दौरान व्यासपीठ से प्रख्यात कथावाचक बिहारी विदुर जी ने भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न बाल लीलाओं का बहुत ही भावपूर्ण और सजीव वर्णन किया। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteभगवान श्रीकृष्ण ने दी प्रकृति के पूजन की प्रेरणा Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteकथा के दौरान गोवर्धन धारण की कथा सुनाते हुए व्यास जी ने बताया कि द्वापर युग में जब ब्रजवासी देवराज इंद्र की पूजा की तैयारी कर रहे थे, तब बाल कृष्ण ने उन्हें रोककर समझाया था। भगवान ने ब्रजवासियों को बताया कि हमें उस प्रकृति का पूजन और सम्मान करना चाहिए, जिससे हमें जीवन के लिए जरूरी अन्न, जल और आश्रय मिलता है। उन्होंने सभी को गोवर्धन पर्वत और गौ माता के महत्व से अवगत कराते हुए गोवर्धन पूजा करने के लिए प्रेरित किया। Add text below Add image below04Heading Paragraph Heading Subheading Quoteइंद्र का मानमर्दन कर सात दिन तक उठाया गोवर्धन पर्वत Add text below Add image below05Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteबाल कृष्ण के कहने पर ब्रजवासियों ने इंद्र पूजा के स्थान पर गोवर्धन पर्वत की पूजा शुरू कर दी। इस बात से कुपित होकर देवराज इंद्र ने ब्रज में मूसलाधार बारिश शुरू कर दी जिससे चारों तरफ पानी भर गया और लोग डर गए। ऐसी विकट स्थिति में भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठ उंगली पर विशाल गोवर्धन पर्वत को उठा लिया और सभी ब्रजवासियों को उसके नीचे शरण दी। भगवान ने लगातार सात दिनों तक पर्वत को उठाए रखकर ब्रजवासियों की रक्षा की। Add text below Add image below06Heading Paragraph Heading Subheading Quoteआज के समय में भी अत्यधिक प्रासंगिक है संदेश Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteकथावाचक ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि गोवर्धन लीला सिर्फ भगवान के चमत्कारों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें पर्यावरण और प्रकृति संरक्षण का बहुत बड़ा संदेश निहित है। पर्वत, वन, नदियां, गौवंश और अन्य प्राकृतिक संसाधन मानव अस्तित्व का मूल आधार हैं, इसलिए इनकी रक्षा करना हम सबका दायित्व है। Add text below Add image below08Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteउन्होंने आगे कहा कि पूतना मोक्ष जहां अधर्म और बुराई के खात्मे का प्रतीक है, वहीं गोवर्धन पूजा हमें प्रकृति के प्रति कृतज्ञ रहने की सीख देती है। आज के दौर में जब पर्यावरण पर लगातार दबाव बढ़ रहा है, श्रीकृष्ण के ये विचार समाज के लिए और अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं। इस दौरान कथा पंडाल में श्रीकृष्ण के जयकारों से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया और श्रद्धालु भावविभोर दिखाई दिए। Add text below Add image below