Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryअशोकनगर में आयोजित साइंस ऑफ लिविंग के विशेष सत्र में मुनिश्री निरंजन सागर जी महाराज ने क्षमा के आध्यात्मिक और व्यावहारिक स्वरूप पर प्रकाश डाला। गंज मंदिर परिसर में पर्युषण पर्व के समापन पर श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे से क्षमा मांगकर आपसी बैर मिटाए।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/ashoknagar-story-db1b93dd
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Heading Paragraph Heading Subheading Quoteसाइंस ऑफ फॉरगिवनेस विषय पर विशेष चर्चा Add text below Add image below02Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteअशोकनगर शहर में चातुर्मास कर रहे मुनिश्री निरंजन सागर जी महाराज के सान्निध्य में शनिवार को साइंस ऑफ लिविंग का विशेष सत्र आयोजित किया गया। इस सत्र का मुख्य विषय 'साइंस ऑफ फॉरगिवनेस' रखा गया था, जिस पर विस्तार से मंथन किया गया। Add text below Add image below03Heading Paragraph Heading Subheading Quoteदूसरों की भूलों को दरकिनार करना ही क्षमा का सार Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteमुनिश्री ने अपने संबोधन में फरमाया कि क्षमा का असली मतलब हर जीव और आत्मा को एक समान समझना है। इसके साथ ही दूसरों की गलतियों को नजरअंदाज कर केवल उनके गुणों पर गौर करना चाहिए। उन्होंने बताया कि क्षमा अंतःकरण का वह बड़ा गुण है, जिसके जरिए सामने वाले व्यक्ति के मन की मैल और शत्रुता हमारे पवित्र आचरण से खुद-ब-खुद खत्म हो जाती है। भटके हुए इंसान को सही राह पर लौटने का मौका देना ही असल में क्षमाभाव कहलाता है। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading Quoteक्षमावाणी पर्व और दशलक्षण पर्व का समापन Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteदशलक्षण यानी पर्युषण पर्व के आखिरी दिन शनिवार की सुबह गंज मंदिर परिसर में क्षमावाणी पर्व पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस दौरान दिगंबर जैन पंचायत समिति के पदाधिकारी, कई सामाजिक संगठनों के नुमाइंदे और बड़ी संख्या में स्थानीय जैन समाज के लोग मौजूद रहे। Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteकार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों ने एक-दूसरे के गले मिलकर और हाथ जोड़कर सालभर में अनजाने में हुई गलतियों के लिए 'उत्तम क्षमा' मांगी और एक-दूसरे को बड़े दिल से माफ किया। प्रत्यक्ष रूप से मिलने के अलावा फोन और सोशल मीडिया के जरिए भी परिचितों और रिश्तेदारों से क्षमा मांगने और देने का सिलसिला पूरे दिन चलता रहा। Add text below Add image below