Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryचंदेरी के एक सरकारी शिक्षक को महीनों से वेतन न मिलने और प्रशासनिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है। आर्थिक तंगी के कारण समय पर इलाज न मिलने से शिक्षक ने एक साल के भीतर अपने माता-पिता दोनों को खो दिया है।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/ashoknagar-story-c0098faa
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Heading Paragraph Heading Subheading Quoteप्रशासनिक व्यवस्था की लापरवाही से उजड़ा हंसता-खेलता परिवार Add text below Add image below02Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteसरकारी तंत्र की उदासीनता किस तरह एक परिवार को पूरी तरह तबाह कर सकती है, इसकी एक बानगी चंदेरी क्षेत्र से सामने आई है। अफसरों की मनमानी और लंबे समय से रुका हुआ वेतन मिलने के कारण एक शिक्षक का परिवार गंभीर आर्थिक संकट और भुखमरी के कगार पर पहुंच गया है। हालात इस कदर बिगड़ गए कि समय पर इलाज न मिलने के कारण शिक्षक को एक ही साल के भीतर अपने माता और पिता दोनों को गंवाना पड़ा। Add text below Add image below03Heading Paragraph Heading Subheading Quoteनिलंबन और प्रतिनियुक्ति का विवाद बना प्रताड़ना की वजह Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteयह पूरा मामला शासकीय माध्यमिक विद्यालय मोहरी में गणित के पद पर कार्यरत शिक्षक अशोक कुमार ओझा से जुड़ा हुआ है। विभागीय उपेक्षा से आहत होकर उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि आगामी 16 नवंबर 2026 तक उन्हें न्याय नहीं मिला, तो वे चंदेरी के दिल्ली दरवाजा या अशोकनगर में कोई ekstrem कदम उठाने को विवश होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। घटना की शुरुआत 14 नवंबर 2025 को हुई थी, जब तत्कालीन कलेक्टर द्वारा प्राथमिक विद्यालय चक जार्सल की आंगनबाड़ी का निरीक्षण किया गया था। वहां नाश्ता बनते देखे जाने के बाद 16 नवंबर को शिक्षक ओझा को निलंबित कर दिया गया था। शिक्षक का कहना है कि उनकी प्रतिनियुक्ति पहले ही समाप्त हो चुकी थी और नए आदेश भी जारी हो चुके थे, फिर भी उन्हें साजिश के तहत मामले में फंसाया गया। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading Quoteवेतन रुकने से नहीं हो सका माता-पिता का इलाज Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteजनवरी 2026 के अंत में दो वेतन वृद्धियां रोकते हुए शिक्षक को बहाल तो कर दिया गया, लेकिन असली मुश्किलें इसके बाद शुरू हुईं। पोर्टल पर मैपिंग न होने और सर्विस बुक की फाइलें गायब होने का हवाला देकर उनका वेतन महीनों तक रोक लिया गया। पैसों की कमी के कारण ओझा अपने बीमार माता-पिता का इलाज नहीं करा पाए। परिणामस्वरूप, 12 जनवरी 2026 को उनकी माता का निधन हो गया और 6 जून 2026 को ब्रेन ट्यूमर व पैरालिसिस से पीड़ित उनके रिटायर्ड प्राचार्य पिता ने भी दम तोड़ दिया। Add text below Add image below07Heading Paragraph Heading Subheading Quoteअधिकारियों का पक्ष Add text below Add image below08Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइस पूरे प्रकरण पर चंदेरी के बीईओ राजेश तिवारी का कहना है कि कलेक्टर द्वारा रोकी गई दो वेतन वृद्धियों की बहाली उन्हीं के स्तर से संभव है, जबकि निलंबन अवधि का वेतन बीआरसी कार्यालय से जारी होना है। उन्होंने बताया कि उन्होंने हाल ही में पदभार संभाला है और मामले से जुड़ी पुरानी फाइलों को मंगवाकर वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में जल्द से जल्द उचित समाधान निकाला जाएगा। Add text below Add image below