Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryअशोकनगर जिले के स्कूलों में मध्यान्ह भोजन तैयार करने के लिए गैस कनेक्शन तो दिए गए हैं, लेकिन समय पर सिलेंडर न मिलने के कारण रसोइयों को धुएं के बीच चूल्हे पर खाना बनाने को मजबूर होना पड़ रहा है। इस व्यवस्था की खामियों से बच्चों और खाना बनाने वाली महिलाओं दोनों को परेशानी उठानी पड़ रCategoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/ashoknagar-story-bc01d249
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Heading Paragraph Heading Subheading Quoteकागजों में योजना, जमीन पर चूल्हे का धुआं Add text below Add image below02Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteशासन की ओर से स्कूलों और आंगनवाड़ियों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए मध्यान्ह भोजन योजना के तहत गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं ताकि बच्चों का खाना स्वच्छ माहौल में और बिना धुएं के तैयार हो सके। हालांकि, मैदानी हकीकत इन दावों से कोसों दूर नजर आ रही है। जिले के कई शिक्षण संस्थानों में गैस कनेक्शन होने के बावजूद नियमित रूप से सिलेंडर रिफिल न होने के कारण एक बार फिर लकड़ी और उपलों के चूल्हे जलने लगे हैं। Add text below Add image below03Heading Paragraph Heading Subheading Quoteकोलुआ और जमाखेड़ी स्कूलों की पड़ताल Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteस्थिति का जायजा लेने के लिए जब विद्यालयों में मध्यान्ह भोजन बनने के समय पड़ताल की गई तो अलग ही तस्वीर सामने आई। शासकीय माध्यमिक स्कूल कोलुआ में गैस पर सब्जी तो बनती मिली, लेकिन साथ ही चूल्हे पर रोटियां भी सेंकी जा रही थीं। स्कूल की शिक्षिका सीमा कुशवाह का कहना है कि बच्चों की संख्या अधिक होने के कारण समय बचाने के लिए चूल्हे का उपयोग किया जाता है। वहीं शासकीय स्कूल जमाखेड़ी में तो हालात और भी ज्यादा चिंताजनक मिले, जहां पूरा मध्यान्ह भोजन ही चूल्हे के धुएं के बीच तैयार किया जा रहा था। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading Quoteसिलेंडर के लिए भटक रहे स्व-सहायता समूह Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteभोजन तैयार करने वाले स्व-सहायता समूहों के सामने सबसे बड़ी बाधा समय पर गैस सिलेंडर का न मिलना बनी हुई है। समूह संचालकों का कहना है कि जब वे सिलेंडर लेने एजेंसी पहुंचते हैं तो उन्हें खाली हाथ लौटा दिया जाता है। जमाखेड़ी स्कूल की समूह अध्यक्ष कलाबाई ने बताया कि वे पिछले तीन दिनों से लगातार ऑटो से सिलेंडर रिफिल कराने जा रही हैं, लेकिन हर बार उन्हें निराश होकर लौटना पड़ रहा है, जिससे रोज ऑटो का किराया भी जेब से जा रहा है। Add text below Add image below07Quote Paragraph Heading Subheading Quoteपिछले कुछ समय से गैस सिलेंडर की समस्या चल रही है। लेकिन स्कूलों के लिए प्राथमिकता से सिलेंडर उपलब्ध कराने के लिए खाद्य विभाग ने एजेंसियों को निर्देशित कर रखा है। जहां समस्या है, वहां पर निरीक्षण कर समाधान कराया जाएगा। - राहुल शर्मा, डीपीसी, अशोकनगर Add text below Add image below