Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryअशोकनगर जिले के पिपरई नगर में विजयादशमी का पर्व पूरी आस्था के साथ मनाया गया। इस दौरान मां बीजासन का पारंपरिक डोला निकाला गया, जिसमें शामिल होने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचे।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/ashoknagar-story-b0019951
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Heading Paragraph Heading Subheading Quoteधार्मिक उल्लास के साथ मनाया गया विजयादशमी पर्व Add text below Add image below02Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteपिपरई नगर में विजयादशमी का पावन पर्व पूरी श्रद्धा, परंपरा और भक्तिभाव के साथ हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस खास अवसर पर मां बीजासन का पारंपरिक डोला निकाला गया, जिसे देखने और आशीर्वाद पाने के लिए नगर के साथ-साथ आसपास के ग्रामीण इलाकों से भी भारी संख्या में लोग पहुंचे। मां बीजासन की यह डोला यात्रा क्षेत्र की प्राचीन और अनूठी सांस्कृतिक परंपराओं में एक विशेष स्थान रखती है। Add text below Add image below03Heading Paragraph Heading Subheading Quoteमंदिर से शुरू होकर प्रमुख मार्गों से गुजरा डोला Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteपारंपरिक डोले की शुरुआत स्थानीय बीजासन मंदिर से विधिवत पूजा-अर्चना के बाद हुई। यहां से यात्रा नगर के मुख्य मार्गों से होते हुए चौधरी साहब की हवेली और राय साहब के दरवाजे तक पहुंची। इस दौरान स्थानीय निवासी अपने घरों के बाहर खड़े होकर माता के डोले का इंतजार करते नजर आए और श्रद्धा के साथ अपनी भेंट अर्पित की। Add text below Add image below05Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteमान्यता के अनुसार इस दौरान श्रद्धालु नारियल, आटा और दाल जैसी वस्तुएं माता को भेंट करते हैं। नगर के विभिन्न समुदायों के लोगों ने इस आयोजन में सक्रिय रूप से भाग लिया। यह परंपरा पिपरई की सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक पहचान का एक अनूठा उदाहरण पेश करती है। Add text below Add image below06Heading Paragraph Heading Subheading Quoteभेंट स्वीकार करने द्वार तक पहुंचती हैं माता Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteस्थानीय लोगों में यह अटूट विश्वास है कि जो भी श्रद्धालु सच्चे मन और पूरी निष्ठा के साथ माता के लिए भेंट तैयार रखता है, मां बीजासन का डोला खुद चलकर उनके द्वार तक पहुंचता है। इसी गहरी आस्था के चलते विजयादशमी के दिन कई परिवार अपने घरों के बाहर थाली सजाकर माता के आगमन की प्रतीक्षा करते दिखाई दिए। Add text below Add image below08Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteक्षेत्र के लोगों के लिए यह आयोजन महज एक धार्मिक यात्रा नहीं है, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही निष्ठा और परंपरा का जीवंत प्रतीक है, जो सभी को आपस में जोड़ता है। Add text below Add image below09Heading Paragraph Heading Subheading Quoteथाना परिसर में पहुंचा डोला और बदला नजारा Add text below Add image below10Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइस डोला यात्रा का सबसे खास और रोचक पल थाना परिसर के पास देखने को मिला। पुरानी परंपरा के अनुसार, जब मां का डोला थाने के मुख्य द्वार पर पहुंचा, तब थाना प्रभारी को खुद बाहर आकर डोले की अगवानी करनी पड़ी। प्रभारी की अगवानी के बाद ही डोले ने थाना परिसर के अंदर प्रवेश किया, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। Add text below Add image below