Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryअशोकनगर के वृद्धाश्रम में रह रहे बुजुर्गों और माताओं ने अपनों की बेरुखी और संपत्ति के लालच के चलते छलके आंसुओं की दर्दभरी दास्तां सुनाई। अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के मौके पर सामने आई इन कहानियों में बच्चों द्वारा जमीन हड़पने और घर से बेदखल किए जाने का सच बयां किया गया है।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/ashoknagar-story-af503f1e
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Heading Paragraph Heading Subheading Quoteअशोकनगर के वृद्धाश्रम में अपनों के छल की दास्तान Add text below Add image below02Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteजिंदगी के अंतिम पड़ाव पर जहां अपनों के सहारे की जरूरत होती है, वहीं संपत्ति के लालच और परिवार की बेरुखी ने कई बुजुर्गों को वृद्धाश्रम की चार दीवारों के भीतर ला खड़ा किया है। अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर अशोकनगर जिले के वृद्धाश्रम का यह सच दिल दहला देने वाला है। यहां कुल 23 बुजुर्ग आश्रय लिए हुए हैं, जिनमें सबसे अधिक 12 माताएं शामिल हैं। जरा-जरा सी जमीन और जायदाद के लालच में अपनों द्वारा किए गए छलावों ने इनकी आंखों में केवल आंसू और गहरा दर्द छोड़ दिया है। Add text below Add image below03Heading Paragraph Heading Subheading Quoteभजन-कीर्तन से बहलाते हैं मन, बेटियों का साथ देता है ढांढस Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteअपनों के सताए ये बुजुर्ग अब वृद्धाश्रम में ही एक-दूसरे के सुख-दुख के साथी बन गए हैं। हालांकि अपनों ने उन्हें बिसरा दिया है, लेकिन कुछेक बेटियों का हालचाल जानने आना इन माताओं को थोड़ी मानसिक राहत जरूर देता है। खाली वक्त में ये माताएं ढोलक और मंजीरे की थाप पर भजन-कीर्तन गाकर अपने दुखों को भुलाने का जतन करती हैं, ताकि जीवन के इस कठिन दौर में कुछ पल सुकून से बीत सकें। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading Quoteकलाबाई और कौशल्या बाई की आपबीती Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteलिधोरा गांव की रहने वाली 68 वर्षीय कलाबाई अहिरवार पिछले पांच साल से इसी वृद्धाश्रम में जीवन गुजार रही हैं। उनके दो बेटे और तीन बेटियां हैं तथा उनके नाम दो बीघा जमीन थी, जिस पर अब बेटों ने कब्जा जमा लिया है और वे ही उसे जोतते हैं। अपनी पीड़ा बयां करते हुए उन्होंने बताया कि उन्होंने जिन बहुओं की खुशियों के लिए दुआएं मांगी, उन्हीं ने उन्हें घर से निकाल दिया। यहां तक कि नातिन की शादी में भी उन्हें नहीं बुलाया गया। वहीं मुंगावली की रहने वाली 60 वर्षीय कौशल्या बाई यादव के पति का निधन आठ साल पहले हो चुका है। उनके नाम पांच बीघा जमीन थी जिसे यह कहकर बिकवा दिया गया कि उनकी पेंशन शुरू कराई जा रही है, और धोखे से अंगूठा लगवाकर उन्हें धक्के मारकर घर से निकाल दिया गया। उन्होंने तीन महीने बीना स्टेशन और तीन महीने भोपाल के रैन बसेरे में गुजारे। जब वे दोबारा घर गईं तो बहू ने चप्पल दिखाकर उन्हें भगा दिया और धमकी दी कि यदि वे घर आईं तो वह ट्रेन के आगे कूद जाएगी। Add text below Add image below07Heading Paragraph Heading Subheading Quoteपुनिया बाई कोली का दर्द Add text below Add image below08Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteपिपरई की रहने वाली 65 वर्षीय पुनिया बाई कोली पिछले छह वर्षों से वृद्धाश्रम में रह रही हैं। उनके तीन बेटियां और दो बेटे हैं। उनके एक बेटे ने उन्हें अपने पास रखने का झांसा देकर उनकी पांच बीघा जमीन बिकवा दी। जमीन के बदले मिले दस लाख रुपए में से पांच लाख रुपए एक बेटे ने अपने पास रख लिए और बाकी रकम की एफडी करवा दी, जिसे बाद में बेटे ने तुड़वा लिया। लेकिन महज छह महीने तक साथ रखने के बाद ही उन्हें भी घर से बेदखल कर दिया गया। Add text below Add image below