Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryपिपरई नगर में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान मुनिश्री दुर्लभ सागर महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि स्वार्थ से परे होकर निभाए गए रिश्ते ही सच्चे और पवित्र होते हैं।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/ashoknagar-story-a87d6fd3
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteपिपरई नगर में एक भव्य धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। इस दौरान संत समागम और प्रवचन का विशेष कार्यक्रम संपन्न हुआ। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteमित्रता में स्वार्थ का कोई स्थान नहीं Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteकार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुनिश्री दुर्लभ सागर जी महाराज ने अपने ओजस्वी वचनों से उपस्थित जनों को मानवता और सच्चे संबंधों का पाठ पढ़ाया। उन्होंने कहा कि दोस्ती करो तो वजह मत खोजना, यदि वजह खोजी तो वह व्यापार बन जाएगा। Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteउन्होंने आगे स्पष्ट किया कि सच्ची मित्रता कभी भी किसी प्रकार के स्वार्थ, लाभ या भौतिक अपेक्षा के तराजू पर नहीं तौली जा सकती है। जब रिश्तों में लेन-देन की भावना आ जाती है, तब आत्मीयता खत्म हो जाती है। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading Quoteव्यावहारिक लेन-देन बनकर रह जाते हैं ऐसे रिश्ते Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteमुनिश्री ने आज के दौर में बदलते सामाजिक संबंधों पर चिंता जताते हुए कहा कि जहाँ रिश्तों में व्यक्तिगत लाभ और हानि का हिसाब-किताब शुरू हो जाता है, वहाँ से प्रेम और पवित्रता हमेशा के लिए समाप्त हो जाती है। Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteऐसे रिश्ते केवल एक व्यावहारिक सौदा या व्यापार बनकर रह जाते हैं। जीवन में संबंधों की वास्तविक सुंदरता और गहराई केवल और केवल निस्वार्थ भाव में ही निहित होती है। Add text below Add image below08Heading Paragraph Heading Subheading Quoteप्राणियों के प्रति करुणा और सहयोग का संदेश Add text below Add image below09Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteअपने संदेश के अंत में मुनिश्री ने बल देते हुए कहा कि प्रत्येक मनुष्य को जीवन में हर प्राणी के प्रति करुणा, प्रेम और सहयोग की भावना रखनी चाहिए। Add text below Add image below10Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteबिना किसी स्वार्थ और बदले में कुछ पाने की अपेक्षा के किया गया जनसहयोग ही मनुष्य के जीवन को वास्तव में सार्थक और महान बनाता है। Add text below Add image below