Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryअशोकनगर जिले के भौरा काछी गांव के अमाही तालाब के पास बसी आबादी के लोग बिजली संकट से परेशान होकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले 15 सालों से उनकी बस्ती में ट्रांसफार्मर नहीं लगाया गया है, जिससे उन्हें भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/ashoknagar-story-a3ad3d4e
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteअशोकनगर जिले के भौरा काछी गांव के अमाही तालाब किनारे स्थित बस्ती के रहवासी बिजली की समस्या से लंबे समय से जूझ रहे हैं। अपनी इसी परेशानी का समाधान कराने के लिए मंगलवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण पुरुष, महिलाएं और बच्चे कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिला प्रशासन के सामने अपनी बात रखी। ग्रामीणों ने बस्ती में जल्द से जल्द नया ट्रांसफार्मर लगवाने की मांग की है। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteढाई दशक से अंधेरे में गुजर रही है रातें Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteस्थानीय निवासियों ने बताया कि बस्ती में करीब 25 से 30 मकान बने हुए हैं, जिनमें लगभग 100 लोग निवास करते हैं। पिछले कई महीनों से उन्हें रात के वक्त बिजली नहीं मिल रही है। दिन के समय केवल पंप लाइन के जरिए कुछ ही घंटों बिजली आती है, लेकिन घरेलू उपयोग के लिए कोई नियमित आपूर्ति नहीं है। रात होते ही पूरा इलाका अंधेरे में डूब जाता है। Add text below Add image below04Heading Paragraph Heading Subheading Quote15 साल पहले हटाया गया था ट्रांसफार्मर Add text below Add image below05Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteग्रामीणों के अनुसार, उनकी इस बस्ती में करीब 15 वर्ष पूर्व सरकारी ट्रांसफार्मर स्थापित किया गया था। जिसे बाद में मेंटेनेंस के नाम पर हटा लिया गया था, लेकिन इसके पश्चात दोबारा ट्रांसफार्मर नहीं लगाया गया। मजबूरन लोग खेतों में लगे अन्य ट्रांसफार्मरों से तार डालकर किसी तरह काम चला रहे थे, जो अब बंद हो चुका है। Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteपिछले छह महीनों से हालात और भी बदतर हो गए हैं क्योंकि केवल दिन में ही पंप लाइन के जरिए बिजली मिल पा रही है। अंधेरे के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, वहीं बुजुर्गों और बच्चों को मच्छरों तथा जहरीले जीव-जंतुओं के भय के साये में रहना पड़ रहा है। Add text below Add image below07Heading Paragraph Heading Subheading Quoteबिना डीपी के आ रहे बिजली के बिल Add text below Add image below08Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteप्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गहरा रोष जताया। उनका आरोप है कि बस्ती में ट्रांसफार्मर या डीपी लगी ही नहीं है, इसके बावजूद उनके घरों पर नियमित रूप से बिजली के बिल भेजे जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बस्ती तक बिजली के तार भी पहुंचे हुए हैं और डीपी रखने के लिए पोल व ढांचा भी तैयार है, केवल ट्रांसफार्मर रखा जाना शेष है। Add text below Add image below09Quote Paragraph Heading Subheading Quoteग्रामीणों ने अधिकारियों को स्पष्ट रूप से आश्वस्त किया है कि यदि उनकी बस्ती में नया ट्रांसफार्मर स्थापित कर दिया जाए, तो वे पूरी ईमानदारी से अपने बिजली के बिलों का भुगतान करेंगे। Add text below Add image below