Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryबहादुरपुर के मुख्य डाकघर में एक दर्जन से अधिक गांवों के हजारों उपभोक्ताओं के खातों का संचालन डिजिटल तकनीक के बजाय आज भी हाथ से पेन के जरिए किया जा रहा है। इस व्यवस्था से स्थानीय लोगों में अपनी जमा पूंजी को लेकर चिंता और आक्रोश बना हुआ है।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/ashoknagar-story-75cd12e8
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Heading Paragraph Heading Subheading Quoteडिजिटल व्यवस्था के दावों के विपरीत हाल Add text below Add image below02Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteदेशभर में बैंकिंग सेवाओं को हाईटेक और डिजिटल बनाने के तमाम दावे किए जा रहे हैं, लेकिन अशोकनगर जिले के बहादुरपुर क्षेत्र से सामने आई हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। यहां स्थित डाकघर में आधुनिक तकनीक का अभाव है और दर्जनों गांवों के लोगों के वित्तीय लेन-देन का रिकॉर्ड आज भी रजिस्टरों और कागजों तक ही सीमित है। Add text below Add image below03Heading Paragraph Heading Subheading Quote12 से ज्यादा गांवों के लोग हैं इस पर निर्भर Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteबहादुरपुर का यह डाकघर आसपास के 12 से अधिक गांवों के निवासियों के लिए मुख्य वित्तीय केंद्र है। ग्रामीण इलाकों के हजारों लोगों के बचत खाते, सुकन्या समृद्धि योजना, आरडी, किसान सम्मान निधि और बुजुर्गों की पेंशन से जुड़े सभी कार्य इसी डाक ऑफिस के माध्यम से संचालित होते हैं। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading Quoteहाथ से पेन से हो रहा हिसाब-किताब Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteग्रामीणों और खाताधारकों का कहना है कि जब वे अपनी मेहनत की कमाई जमा कराने या निकालने आते हैं, तो उनकी पासबुक पर कंप्यूटर प्रिंटेड एंट्री के बजाय कर्मचारियों द्वारा पेन से लिखकर हिसाब दर्ज किया जाता है। लाल और नीले पेन से किए जाने वाले इन लेन-देन के कारण पासबुक पर कोई पुख्ता डिजिटल प्रमाण नहीं बचता है। Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइस प्रकार की कार्यप्रणाली से उपभोक्ताओं में भारी रोष व्याप्त है। खाताधारकों का तर्क है कि वर्तमान समय में जब धोखाधड़ी और वित्तीय गड़बड़ियों के मामले सामने आ रहे हैं, तब पेन से की जाने वाली प्रविष्टियों पर आंख मूंदकर भरोसा करना मुश्किल हो गया है। लोगों को डर सता रहा है कि यदि कोई गड़बड़ी हुई तो उनके पास कोई ठोस डिजिटल सुबूत नहीं होगा। Add text below Add image below