Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryअशोकनगर के सुभाषगंज जैन मंदिर में मुनिश्री निरंजन सागर जी महाराज के सानिध्य में धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन जारी हैं। रविवार की धर्मसभा में मुनिश्री ने कहा कि सिर्फ दो रोटी कमाने की शिक्षा से जीवन सार्थक नहीं होता, बल्कि ज्ञान का सही प्रयोग ही चरित्र का निर्माण करता है।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/ashoknagar-story-6d0ba2e9
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Heading Paragraph Heading Subheading Quoteसुभाषगंज मंदिर में गूंज रहे प्रवचन Add text below Add image below02Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteअशोकनगर शहर में इस समय चातुर्मास चल रहा है। सुभाषगंज स्थित जैन मंदिर में मुनिश्री निरंजन सागर जी महाराज के पावन सानिध्य में प्रतिदिन विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। जैन समाज द्वारा यहाँ पर्युषण पर्व भी पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। Add text below Add image below03Heading Paragraph Heading Subheading Quoteसांस्कृतिक कार्यक्रमों और आयोजनों की धूम Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteपर्व के दौरान मंदिर परिसर में सुबह से लेकर देर शाम तक विविध धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हो रहे हैं। वहीं, शाम के समय सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं। मुनिश्री के सानिध्य में इन दिनों 'साइंस ऑफ लिविंग' विषय पर विशेष प्रवचन श्रृंखला चल रही है। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading Quoteविद्या वही जो बंधनों से मुक्त करे Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteरविवार को आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री निरंजन सागर जी महाराज ने कहा कि ज्ञान के व्यावहारिक प्रयोग का नाम ही चरित्र है। उन्होंने भारतीय संस्कृति और प्राचीन ग्रंथों का हवाला देते हुए समझाया कि 'सा विद्या या विमुक्तये' यानी विद्या और ज्ञान वही है, जो मनुष्य को अज्ञानता और मोह-माया के बंधनों से पूरी तरह मुक्त कर सके। Add text below Add image below07Quote Paragraph Heading Subheading Quoteआज समाज बच्चों को विदेशों तक केवल दो रोटी कमाने और भौतिक सुख-सुविधाएं जुटाने के लिए भेज रहा है, लेकिन सत्य और ज्ञान को पाकर लौटने की सीख कोई नहीं दे रहा। Add text below Add image below08Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteमुनिश्री ने चिंता जताते हुए कहा कि आज की शिक्षा प्रणाली केवल आजीविका कमाने तक सीमित रह गई है। अभिभावक अपने बच्चों को केवल भौतिक सुख और धनार्जन के लिए दूर-दूर भेज रहे हैं, जबकि जीवन को सार्थक बनाने के लिए संस्कारों और नैतिक ज्ञान की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। Add text below Add image below09Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteअपने संदेश के अंत में मुनिश्री ने फरमाया कि ज्ञान का सच्चा और वास्तविक परिणाम यही है कि प्राणी मात्र के प्रति मन में मैत्री भाव जागृत हो। मैत्री का सीधा अर्थ सभी जीवों का भला चाहना और उनके प्रति करुणा का भाव रखना है। Add text below Add image below