Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryग्वालियर के जीवाजी विश्वविद्यालय के छात्रों और शोधार्थियों ने अशोकनगर जिले के ऐतिहासिक और पुरातात्विक स्थलों का शैक्षणिक भ्रमण किया। इस दौरान दल ने कदवाया, रन्नोद, महुआ और तेरही के प्राचीन मंदिरों की वास्तुकला का बारीकी से मुआयना किया।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/ashoknagar-story-521b3586
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Heading Paragraph Heading Subheading Quoteजीवाजी विश्वविद्यालय के दल ने किया अशोकनगर का शैक्षणिक भ्रमण Add text below Add image below02Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteग्वालियर स्थित जीवाजी विश्वविद्यालय की प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व अध्ययनशाला के विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने हाल ही में अशोकनगर जिले की प्राचीन धरोहरों का प्रत्यक्ष अध्ययन किया। विभागाध्यक्ष डॉ. शांतिदेव सिसोदिया के निर्देशन में संपन्न हुए इस शैक्षणिक दौरे में एमए तृतीय सेमेस्टर के लगभग 35 छात्र-छात्राओं के अलावा कई पीएचडी शोधार्थियों ने भी शिरकत की। Add text below Add image below03Heading Paragraph Heading Subheading Quoteगुप्तकालीन और मध्यकालीन स्थापत्य कला का बारीकी से किया गया अध्ययन Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइस शैक्षणिक दल ने जिले के कदवाया, रन्नोद, महुआ और तेरही क्षेत्रों में पहुंचकर वहां मौजूद प्राचीन मंदिर समूहों, ऐतिहासिक शैव मठों और अन्य पुरातात्विक अवशेषों का गहराई से मुआयना किया। विद्यार्थियों ने गुप्त काल और मध्यकाल के दौरान निर्मित इन मंदिरों की अनूठी स्थापत्य शैली के साथ-साथ पत्थरों पर उकेरी गई प्राचीन मूर्तिकला के ऐतिहासिक पक्षों को समझा। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading Quoteविशेषज्ञों से जाने क्षेत्र के अनछुए ऐतिहासिक और पुरातात्विक रहस्य Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteभ्रमण के दौरान जब यह दल कदवाया पहुंचा, तो स्थानीय पुरातत्वविद् हेमंत दुबे ने विद्यार्थियों को इस क्षेत्र के गौरवशाली इतिहास और प्राचीन शैव परंपरा के विकास के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस दौरान छात्रों ने पत्थरों पर बनी विभिन्न आकृतियों और प्राचीन लिपि से जुड़े कई सवाल भी पूछे, जिनका मौके पर मौजूद विशेषज्ञों ने संतोषजनक जवाब दिया। Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइस अध्ययन यात्रा में शामिल पीएचडी शोधार्थी वैभव शर्मा और वैशाली गुर्जर ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि कदवाया को पहले ही पर्यटन ग्राम घोषित किया जा चुका है। हालांकि, यदि रन्नोद, महुआ और तेरही जैसे अन्य पुरातात्विक स्थलों को भी इसके साथ जोड़ दिया जाए। Add text below Add image below08Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteशोधार्थियों का मानना है कि इन सभी ऐतिहासिक स्थलों को मिलाकर यदि एक एकीकृत हेरिटेज टूरिज्म सर्किट तैयार किया जाए, तो यह पूरा अंचल मध्य प्रदेश के पर्यटन मानचित्र पर एक प्रमुख और आकर्षक केंद्र के रूप में अपनी नई पहचान बना सकता है। Add text below Add image below