Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryपिपरई के जैन मंदिर में आयोजित चातुर्मास धर्मसभा में मुनि श्री दुर्लभसागर जी महाराज ने अहिंसा के व्यापक स्वरूप पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दूसरों के दुख में यथासाध्य मदद करना और मन में करुणा का भाव रखना ही सच्चा धर्म है।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/ashoknagar-story-1758b705
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteअशोकनगर जिले के पिपरई स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर में इन दिनों चातुर्मास के पावन अवसर पर प्रतिदिन धर्मसभा का आयोजन किया जा रहा है। मुनि श्री दुर्लभसागर जी महाराज के सानिध्य में सजे इस धार्मिक दरबार में नगर के साथ-साथ दूर-दराज के ग्रामीण अंचलों से भी भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteअहिंसा का दायरा सिर्फ जीव रक्षा तक सीमित नहीं Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteधर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री दुर्लभसागर जी महाराज ने कहा कि आम तौर पर लोग किसी भी जीव को शारीरिक चोट न पहुँचाने को ही अहिंसा मान लेते हैं, लेकिन अहिंसा का दायरा इससे बहुत अधिक व्यापक है। उन्होंने समझाया कि हर प्राणी को सुख और आराम मिले, ऐसा विचार मन में रखना तथा अपनी क्षमता के अनुसार उसकी मदद करना ही अहिंसा का वास्तविक स्वरूप है। Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteमुनि श्री ने आगे कहा कि किसी भी दुखी व्यक्ति की पीड़ा को समझना और उसके निवारण के लिए प्रयास करना मानव जीवन का मुख्य आचार होना चाहिए। जब समाज के लोग एक-दूसरे का सहयोग करते हैं, तो आपसी प्रेम और सद्भाव स्वतः ही मजबूत होने लगता है। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading Quoteजयकारों से गूंजा मंदिर परिसर और लिए गए संकल्प Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteचातुर्मास के दौरान आयोजित इन आयोजनों से पूरा मंदिर परिसर जय जिनेंद्र के जयकारों और मुनि श्री की अमृतवाणी से गुंजायमान हो रहा है। प्रवचन सुनने आए श्रद्धालुओं ने अनुशासन के साथ उपदेशों को आत्मसात किया और दैनिक जीवन में संयम, परोपकार तथा अहिंसा के मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराया। Add text below Add image below07Heading Paragraph Heading Subheading Quoteत्रिस्तरीय शुद्धि से बनता है अहिंसामय जीवन Add text below Add image below08Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteअहिंसा के गूढ़ रहस्यों को समझाते हुए मुनि श्री ने स्पष्ट किया कि अहिंसा की शुरुआत बाह्य आचरण से नहीं बल्कि आंतरिक विचारों से होती है। एक सच्चे अहिंसक व्यक्ति के जीवन में मन की पवित्रता यानी ईर्ष्या व द्वेष से दूरी, वाणी का संयम यानी किसी को ठेस न पहुँचाना, और कर्म की शुद्धता यानी किसी को कष्ट न देने का भाव प्रमुख रूप से होना चाहिए। Add text below Add image below