Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryश्री वासुपूज्य श्वेतांबर जैन मंदिर में पर्युषण महापर्व के छठे दिन धार्मिक अनुष्ठानों की धूम रही। कल्पसूत्र वाचन के दौरान भगवान महावीर के जन्म और जीवन प्रसंगों का सुंदर वर्णन किया गया।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/ashoknagar-story-0c88c4a2
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteअशोकनगर के श्री वासुपूज्य श्वेतांबर जैन मंदिर में पर्युषण महापर्व का उल्लास इन दिनों चरम पर है। पर्व के छठे दिन आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों में जैन समाज के लोगों ने पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ हिस्सा लिया, जिससे पूरा मंदिर परिसर आध्यात्मिक रंग में रंगा नजर आया। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteकल्पसूत्र वाचन और जन्मोत्सव के प्रसंग Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteधार्मिक अनुष्ठानों के दौरान श्रावक जी के सानिध्य में कल्पसूत्र का वाचन किया गया। इस दौरान भगवान महावीर स्वामी के जन्म से लेकर उनकी दीक्षा तक के प्रेरणादायी प्रसंगों का विस्तार से वर्णन हुआ, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए और मंदिर परिसर प्रभु के जयकारों से गूंज उठा। Add text below Add image below04Heading Paragraph Heading Subheading Quoteप्रभु महावीर के त्याग और उपदेशों पर प्रकाश Add text below Add image below05Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteप्रवचन के दौरान बताया गया कि कल्पसूत्र हमें भगवान महावीर के त्याग और तपस्या के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। प्रभु के जन्म के बाद 63 दिक्कुमारियों और 64 इंद्रों ने मेरु पर्वत पर दिव्य जन्मोत्सव मनाया था, जिससे पूरे लोक में मंगलमय माहौल बन गया था। Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteदीक्षा प्राप्ति के बाद भगवान महावीर को कई उपसर्गों का सामना करना पड़ा। चंड कौशिक सर्प के उद्धार का प्रसंग सुनाते हुए यह संदेश दिया गया कि क्रोध और अहंकार इंसान के पतन की वजह बनते हैं, जबकि क्षमा और समभाव ही मनुष्य की असली ताकत हैं। Add text below Add image below07Heading Paragraph Heading Subheading Quoteपालना और स्वप्न यात्रा के साथ महापूजन Add text below Add image below08Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteदोपहर से पहले भगवान महावीर स्वामी के पालने और स्वप्न जी को गाजे-बाजे और ढोल-नगाड़ों के साथ लाभार्थी कोचर परिवार के निवास से मंदिर परिसर तक लाया गया। इस दौरान पंचकल्याणक महापूजन और श्री शांतिस्नात्र पूजन का आयोजन हुआ, जिसमें बच्चों और युवाओं ने भारी संख्या में शिरकत की। Add text below Add image below09Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइस धार्मिक आयोजन के दौरान भगवान को पालना व स्वप्न अर्पित करने का सौभाग्य कोचर परिवार को मिला। वहीं पंचकल्याणक महापूजन दीपेश कुमार आदिश अवॉड परिवार द्वारा संपन्न कराया गया और प्रभावना वितरण राजमल, नितिन कुमार एवं धीर कोठारी परिवार की तरफ से किया गया। Add text below Add image below