Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryअशोकनगर में फाइनेंस बैंक के ग्राहक से अंग्रेजी में बात कर ठगों ने क्रेडिट कार्ड का वाउचर सक्रिय करने का झांसा दिया। असली टोल-फ्री नंबर से कॉल कर आरोपियों ने वीडियो कॉल पर स्क्रीन शेयर कराई और तीन बार में 1.50 लाख रुपए उड़ा लिए।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/ashoknagar-story-02bf3704
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Heading Paragraph Heading Subheading Quoteअसली नंबर से आया फोन, अंग्रेजी में की बात Add text below Add image below02Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteअशोकनगर क्षेत्र में साइबर ठगों ने ठगी का नया और शातिर तरीका अपनाया है। अब ठग हिंदी के बजाय फर्राटेदार अंग्रेजी बोलकर लोगों को बैंक अधिकारी होने का विश्वास दिला रहे हैं। ऐसा ही एक ताजा मामला सामने आया है जिसमें शातिर बदमाशों ने फाइनेंस बैंक के एक ग्राहक को अपना शिकार बनाते हुए उसके बैंक खाते से डेढ़ लाख रुपए पार कर दिए। Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteखास बात यह रही कि ठगों ने कॉल करने के लिए बैंक के असली टोल-फ्री नंबर का इस्तेमाल किया था। नंबर असली दिखने के कारण पीड़ित व्यापारी को शुरुआत में किसी प्रकार का संदेह नहीं हुआ और वह आसानी से उनके झांसे में फंसता चला गया। Add text below Add image below04Heading Paragraph Heading Subheading Quoteशॉपिंग वाउचर एक्टिवेट करने का दिया झांसा Add text below Add image below05Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteपीड़ित व्यापारी शिवम छाबड़ा ने बताया कि उन्होंने कुछ समय पहले ही एक फाइनेंस बैंक से नया क्रेडिट कार्ड बनवाया था। बीते 7 अक्टूबर को उनके पास एक कॉल आई थी। फोन करने वाले व्यक्ति ने अंग्रेजी में बातचीत शुरू की और खुद को पढ़ा-लिखा बैंककर्मी बताया। Add text below Add image below06Quote Paragraph Heading Subheading Quoteवेरी गुड आफ्टरनून सर, आपको कार्ड डिलीवर हो गया है, यू आर नॉट फेसिंग एनी प्रॉब्लम? Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteकॉल करने वाले ने क्रेडिट कार्ड का वेलकम वाउचर शॉपिंग वाउचर के रूप में एक्टिवेट करने का लालच दिया। जब पीड़ित के मोबाइल ऐप पर एक्टिवेशन का विकल्प नहीं दिखा, तो ठग ने चालाकी से कॉल पहले अपने कथित सीनियर और बाद में एक महिला को ट्रांसफर कर दी। Add text below Add image below08Heading Paragraph Heading Subheading Quoteस्क्रीन शेयर कराकर खुद ही दर्ज किया ओटीपी Add text below Add image below09Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइसके बाद आरोपियों ने व्हाट्सएप पर एक लिंक भेजकर उस पर क्लिक करवाया और कार्ड नंबर दर्ज कराया। वीडियो कॉल के जरिए पीड़ित के फोन की स्क्रीन शेयर करवा ली गई। मोबाइल की स्क्रीन साझा होने के कारण ठगों को ओटीपी दिख गया और उन्होंने खुद ही ओटीपी दर्ज कर तीन अलग-अलग चरणों में पचास-पचास हजार रुपए यानी कुल डेढ़ लाख रुपए निकाल लिए। Add text below Add image below10Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteघटना का पता चलते ही पीड़ित ने तुरंत अपना क्रेडिट कार्ड ब्लॉक करवाया और मामले की शिकायत साइबर सेल में दर्ज कराई। विशेषज्ञों के अनुसार ठग इंटरनेट आधारित वीओआईपी और स्पूफिंग सॉफ्टवेयर का उपयोग करते हैं, जिससे कॉलर आईडी पर असली नंबर दिखाई देता है। स्क्रीन शेयरिंग का उद्देश्य एसएमएस ट्रे में आने वाले ओटीपी को देखना होता है। Add text below Add image below