Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryअशोकनगर जिले के जोलन गांव में खेतों में काम करने वाले 33 मजदूरों को दो हफ्ते से अधिक समय बीतने के बाद भी मेहनताना नहीं मिला है। परेशान होकर मजदूर अपने बच्चों और सामान के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे और न्याय की गुहार लगाई।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/ashoknagar-33-15-41f56759
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteअशोकनगर जिले के जोलन गांव का एक मामला सामने आया है, जहां मक्का के भुट्टे तोड़ने के कार्य में लगे 33 मजदूरों ने पारिश्रमिक नहीं मिलने पर नाराजगी जताई है। मजदूरों का कहना है कि उन्होंने करीब पंद्रह दिन तक खेतों में मेहनत की, लेकिन उन्हें तयशुदा भुगतान नहीं दिया गया। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quote450 रुपए प्रतिदिन की तय हुई थी मजदूरी Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteयह सभी मजदूर रीवा, सीधी, शहडोल और मैहर जिले के अमरपाटन क्षेत्र के रहने वाले हैं। रोजगार की तलाश में ये लोग ट्रेन के जरिए पिपरई रेलवे स्टेशन पहुंचे थे। स्टेशन से जोलन गांव के रहने वाले भोलू जाट इन्हें अपने साथ खेत ले गए थे। तय समझौते के अनुसार इन मजदूरों को प्रतिदिन 450 रुपए मजदूरी दी जानी थी। Add text below Add image below04Heading Paragraph Heading Subheading Quoteरुपये मांगने पर दी गई धमकी और गांव छोड़ने का दबाव Add text below Add image below05Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteमजदूरों ने आरोप लगाया कि पंद्रह दिन तक लगातार काम करने के बावजूद उन्हें मेहनताने के नाम पर केवल दो हजार रुपये ही शुरुआती दौर में दिए गए थे। इसके बाद उनके पास खाने-पीने का भी संकट खड़ा हो गया। जब उन्होंने अपनी पूरी मजदूरी मांगी, तो उन्हें पहले काम चालू रखने को कहा गया और भुगतान की जिद करने पर उन्हें धमकाते हुए गांव से जाने का दबाव बनाया गया। Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteभुगतान न मिलने पर शुक्रवार की सुबह सभी मजदूर अपने बच्चों और सामान के साथ पैदल ही गांव से बाहर निकल पड़े। रास्ते में एक ऑटो चालक ने उनकी स्थिति को देखते हुए उनकी मदद की और उन्हें अशोकनगर तक पहुंचाया। शाम के वक्त ये सभी पीड़ित मजदूर कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे और प्रशासनिक अधिकारियों को अपनी दास्तां सुनाई। Add text below Add image below07Heading Paragraph Heading Subheading Quoteश्रम विभाग ने फोन पर की चर्चा Add text below Add image below08Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteकलेक्ट्रेट में शिकायत मिलने के बाद श्रम विभाग के अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया। अधिकारियों ने संबंधित व्यक्ति से फोन के माध्यम से संपर्क किया। विभाग के मुताबिक उस व्यक्ति ने बकाया राशि चुकाने की बात तो कही है, लेकिन भुगतान की निश्चित तिथि स्पष्ट नहीं की है। इस पूरे प्रकरण की सूचना संबंधित थाने को भी दे दी गई है। Add text below Add image below