Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryअशोकनगर जिले के कदवाया में स्थित बीजासन माता मंदिर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र है। करीब 300 साल पहले एक स्वप्न के आधार पर इस सिद्धपीठ की स्थापना हुई थी, जहां मन्नत पूरी होने पर सोने-चांदी की आंखें चढ़ाई जाती हैं।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/ashoknagar-300-36275c77
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Heading Paragraph Heading Subheading Quoteकदवाया का प्रसिद्ध बीजासन माता मंदिर Add text below Add image below02Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteईसागढ़ विकासखंड के अंतर्गत आने वाले कदवाया क्षेत्र में स्थित बीजासन माता का मंदिर इलाके के हजारों लोगों की अटूट आस्था का मुख्य केंद्र है। यहाँ आने वाले भक्तों का मानना है कि माता दरबार में सच्ची श्रद्धा से मांगने पर हर मनोकामना पूरी होती है। Add text below Add image below03Heading Paragraph Heading Subheading Quoteभरे जाते हैं जवारे और लगता है मेला Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइस पावन स्थल पर साल में दोनों बार यानी चैत्र और शारदीय नवरात्र के पावन अवसरों पर भव्य मेलों का आयोजन किया जाता है। इस दौरान माता के दर्शन और पूजन के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु कदवाया पहुँचते हैं। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading Quoteस्वप्न से जुड़ी है स्थापना की कहानी Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteस्थानीय मान्यताओं के अनुसार, लगभग तीन सौ साल पहले उत्तर प्रदेश के सतलौन निवासी दुलारे पंडा को बार-बार यह सपना आया कि जमीन के भीतर बीजासन देवी की प्रतिमा दबी हुई है। उन्हीं संकेतों के आधार पर जब खुदाई की गई, तो वहाँ से माता की दिव्य मूर्ति प्रकट हुई। Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइसके बाद दुलारे पंडा उस प्रतिमा को बैलगाड़ी में सवार कर कदवाया की तरफ चल पड़े। मार्ग में रात्रि होने पर उन्होंने एक कुएं और चौतरे के पास विश्राम किया, लेकिन अगली सुबह जब यात्रा दोबारा शुरू करने की कोशिश की गई, तो बैलगाड़ी के पहिए आगे नहीं बढ़े। Add text below Add image below08Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteतमाम कोशिशों के बावजूद जब बैलगाड़ी टस से मस नहीं हुई, तो इसे देवी की ही मर्जी मान लिया गया और प्रतिमा को उसी स्थान पर स्थापित कर दिया गया, जो आज बीजासन माता धाम के रूप में विख्यात है। Add text below Add image below09Heading Paragraph Heading Subheading Quoteसोने-चांदी की आंखें चढ़ाने की अनोखी परंपरा Add text below Add image below10Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteमंदिर परिसर में जवारे अर्पित करने की परंपरा के साथ-साथ एक और खास मान्यता जुड़ी हुई है। श्रद्धालुओं में अटूट विश्वास है कि माता की कृपा से आंखों से जुड़ी तमाम परेशानियों में आराम मिलता है, जिसके चलते मन्नत पूरी होने पर भक्त यहाँ सोने और चांदी की आंखें अर्पित करते हैं। Add text below Add image below