Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryकेंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अशोकनगर में एक युवा संवाद कार्यक्रम के दौरान अपने जीवन के मुश्किल पलों को साझा किया। उन्होंने 2019 के चुनाव परिणाम और वर्ष 2001 में अपने पिता के निधन के समय के अनुभवों के बारे में खुलकर बात की।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/ashoknagar-2019-fbdd984e
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteअशोकनगर जिले में हाल ही में आयोजित एक युवा संवाद कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने जीवन के कई अनछुए पहलुओं पर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने युवाओं के सवालों के जवाब देते हुए अपने राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी चुनौती यानी साल 2019 की हार का भी विशेष रूप से जिक्र किया। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteगलती दूसरों पर थोपने के बजाय खुद में झांका Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteकार्यक्रम में एक युवा द्वारा पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए सिंधिया ने बताया कि जब इंसान असफल होता है, तो आम तौर पर वह अपनी नाकामी का ठीकरा दूसरों पर फोड़ने लगता है। उन्होंने समझाया कि जब हम किसी और पर एक उंगली उठाते हैं, तो बाकी तीन उंगलियां हमारी खुद की तरफ इशारा करती हैं। वर्ष 2019 में चुनाव हारने के बाद उनके मन में भी यही विचार आया कि खामी कहीं न कहीं उनके अंदर ही रही होगी। उन्होंने खुद को बदलने और जनता के साथ अपने पुराने रिश्तों को नए सिरे से जोड़ने पर ध्यान केंद्रित किया। Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteउन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि दुख होना स्वाभाविक है, लेकिन उस दुख के साथ ही भीतर इतनी शक्ति भी होनी चाहिए कि इंसान दोबारा उठकर कड़ी मेहनत कर सके। जब आत्मविश्वास और मेहनत का यह संगम बनता है, तो सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है। उन्होंने सलाह दी कि जीवन में जब भी ऐसे चौराहे आएं जहां दिशा चुननी पड़े, तो फैसले दिमाग के साथ-साथ दिल की आवाज सुनकर लें। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading Quoteपिता के निधन के समय का कठिन दौर किया साझा Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteअपने जीवन के सबसे बड़े और शुरुआती संकट को याद करते हुए केंद्रीय मंत्री ने वर्ष 2001 का वह दिन याद किया जब वह बेंगलुरु जा रहे थे और उन्हें उनके पिता के निधन की सूचना मिली थी। उन्होंने बताया कि उस दुखद घड़ी में भी ईश्वर व्यक्ति को भीतर से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है। उस समय उनके सामने अपनी मां और बहन की देखभाल करने के साथ-साथ अपने पिता से जुड़े लाखों लोगों के परिवार को संभालने की बड़ी जिम्मेदारी थी। Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteसिंधिया ने कहा कि वक्त बहुत तेजी से बीतता है और 2001 से लेकर आज तक 25 साल का सफर पूरा हो चुका है। यदि जीवन में कभी कोई बड़ी विपत्ति या गहरी खाई जैसी स्थिति आए, तो व्यक्ति को कभी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए और पूरे आत्मविश्वास के साथ दोबारा खड़े होना चाहिए। Add text below Add image below08Heading Paragraph Heading Subheading Quoteनौकरी के दिनों को किया याद और डांडिया में लिया हिस्सा Add text below Add image below09Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteअपने शुरुआती पेशेवर जीवन के अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि राजनीति में आने से पहले उन्होंने करीब छह साल तक न्यूयॉर्क, हॉन्गकॉन्ग और मुंबई जैसे शहरों में नौकरी की थी। मुंबई में संघर्ष के दिनों को याद करते हुए उन्होंने बताया कि कैसे वे बारिश के दौरान भागकर टैक्सी में बैठते थे और इन तमाम अनुभवों ने उन्हें जीवन के बहुमूल्य पाठ पढ़ाए। Add text below Add image below10Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteयुवाओं को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि वही काम चुनें जिसमें उनकी सच्ची रुचि हो और जो उनका दिल कहे। इस अशोकनगर प्रवास के दौरान युवा संवाद के बाद सिंधिया एक स्थानीय डांडिया कार्यक्रम में भी पहुंचे, जहां उन्होंने पूरे उत्साह के साथ डांडिया खेला और क्षेत्रवासियों को नवरात्रि पर्व की शुभकामनाएं दीं। Add text below Add image below