Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryशिवपुरी जिले की कोलारस जनपद के छीपौल गांव में बिजली गुल होने से पिछले पांच दिनों से पेयजल संकट बना हुआ है। बोरवेल की मोटर बंद होने के कारण करीब 250 परिवारों को नाले से पानी लाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/shivpuri-story-6998f404
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Heading Paragraph Heading Subheading Quoteपांच दिन से बिजली गुल, ठप पड़ी जलापूर्ति Add text below Add image below02Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteशिवपुरी जिले के कोलारस विकासखंड के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत कौटानाका का छीपौल गांव इन दिनों गंभीर पेयजल समस्या से जूझ रहा है। यहां पिछले पांच दिनों से बिजली की आपूर्ति पूरी तरह से बाधित है, जिसके कारण स्थानीय स्कूल परिसर में लगाया गया नया बोरवेल चालू नहीं हो पा रहा है। बिजली न मिलने से मोटर बंद पड़ी है और गांव के लगभग 250 घरों की आबादी पानी के लिए खासी परेशान हो रही है। Add text below Add image below03Heading Paragraph Heading Subheading Quoteराजस्थान सीमा से सटा है यह दूरस्थ गांव Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteछीपौल गांव कोलारस क्षेत्र का अंतिम छोर है और यह राजस्थान की सीमा से सटा हुआ है। ग्रामीणों की शिकायत है कि दूरस्थ स्थिति होने के कारण यहां की बुनियादी जरूरतों पर समय पर ध्यान नहीं दिया जाता है। लोगों का कहना है कि पेयजल का कोई और वैकल्पिक साधन न होने के कारण उन्हें मजबूरन गंदा नाला पार कर वहां से पानी ढोकर लाना पड़ रहा है। इसी दूषित पानी को पीने के अलावा अन्य घरेलू कामों में भी इस्तेमाल किया जा रहा है। Add text below Add image below05Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteस्थानीय निवासी स्वनजू आदिवासी ने बताया कि बिजली न होने के चलते स्कूल वाला बोर काम नहीं कर रहा है, जिससे उन्हें नाले का पानी उपयोग में लेना पड़ रहा है। वहीं, मवला आदिवासी ने रोष जताते हुए कहा कि यदि बोरवेल के साथ कोई अन्य हैंडपंप चालू हालत में होता, तो ग्रामीणों को यह बदतर हालात नहीं देखने पड़ते। Add text below Add image below06Heading Paragraph Heading Subheading Quoteविभाग ने दी सफाई, बिजली लौटते ही शुरू होगी सप्लाई Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइस पूरे मामले पर पीएचई विभाग के कार्यपालन यंत्री (ईई) शुभम अग्रवाल ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य केंद्र के पास करीब तीन महीने पहले ही नया बोरवेल करवाया गया था और उसमें मोटर भी डाली गई थी ताकि पानी मिल सके। फिलहाल बिजली कटने की वजह से वह मोटर बंद है और बिजली आपूर्ति बहाल होते ही बोर से फिर से पानी मिलना शुरू हो जाएगा। Add text below Add image below08Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteईई अग्रवाल ने यह भी कहा कि बिजली बंद रहने के दौरान ग्रामीण अमूमन कुएं के पानी का उपयोग पीने के लिए करते हैं और अन्य कार्यों में नदी के पानी का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, ग्रामीणों ने मांग उठाई है कि स्कूल के बोर पर मोटर के अलावा हैंडपंप की भी सुविधा जोड़ी जाए, ताकि बिजली न होने पर भी पानी की वैकल्पिक व्यवस्था बनी रहे। Add text below Add image below