Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryशिवपुरी के ऐतिहासिक नरवर किले से सिंधिया रियासत की 400 साल पुरानी एक दुर्लभ तोप चोरी हो गई है। करीब 3500 किलो वजनी इस तोप को चोर करीब 3000 फीट नीचे उतारकर ले गए। आशंका है कि यह चोरी अंतरराष्ट्रीय कबाड़ी गिरोह ने की है, जिसकी कीमत ब्लैक मार्केट में 3 से 5 करोड़ रुपये तक हो सकती हैCategoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/shivpuri-400-3-4b5bd7e2
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteशिवपुरी जिले के नरवर किले से एक बड़ी चोरी की घटना सामने आई है, जहां सिंधिया रियासत की 400 साल पुरानी एक ऐतिहासिक तोप को चोर चुरा ले गए। यह तोप 16वीं शताब्दी की बताई जा रही है और इसका वजन करीब 3500 किलोग्राम है। आशंका जताई जा रही है कि इस चोरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय एंटीक गिरोह का हाथ हो सकता है, और इसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में 3 से 5 करोड़ रुपये तक आंकी जा रही है। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteचोरी की सुनियोजित योजना Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteचोरों ने इस वारदात को अत्यंत सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया। उन्होंने पहले तोप को गद्दों में लपेटा, ताकि आवाज न हो और किसी को शक न हो। इसके बाद, बैरिंग लगी लोहे की ट्रॉली की मदद से करीब 3000 फीट की ऊंचाई से तोप को नीचे उतारा गया। नीचे लाने के बाद, उसे एक बड़े वाहन में लादकर फरार हो गए। यह घटना 15-16 जुलाई की मध्यरात्रि को हुई। Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइस चोरी का एक और पहलू यह सामने आया है कि चोरों ने करीब 10 दिन पहले भी इसी तोप को चुराने की कोशिश की थी। 4-5 जुलाई की रात को उन्होंने तोप को उसके स्थान से नीचे गिरा दिया था, लेकिन अत्यधिक वजन के कारण वे उसे वहां से ले जाने में असफल रहे थे। उस समय सुरक्षाकर्मियों ने शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading Quoteसुरक्षा में चूक और मिले सुराग Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteघटना के समय किले में सुरक्षाकर्मी ड्यूटी पर मौजूद नहीं थे, जिसका फायदा चोरों ने उठाया। किले के बाहर भारी वाहनों के टायरों के निशान मिले हैं, जो इस ओर इशारा करते हैं कि चोरों ने तोप को ले जाने के लिए बड़े वाहनों का इस्तेमाल किया। Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteराज्य पुरातत्व विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया है। जांच के दौरान, मौके से गद्दे, रजाई, लोहे के पाइप और तोप को घसीटकर ले जाने के निशान बरामद हुए हैं। किले के पिछले दुर्गम रास्ते पर भी वाहन के टायरों के निशान पाए गए हैं, जो चोरों के भागने के मार्ग का संकेत दे रहे हैं। Add text below Add image below08Heading Paragraph Heading Subheading Quoteसुरक्षा गार्डों ने कबूली लापरवाही Add text below Add image below09Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteसुरक्षा गार्डों ने अपनी लापरवाही स्वीकार की है। एक गार्ड ने बताया कि किले पर रात में रुकने की कोई व्यवस्था नहीं है और न ही टॉर्च जैसे सुरक्षा संसाधन उपलब्ध हैं, इसलिए वह रात में घर चला गया था। दूसरे गार्ड ने भी घटना के समय ड्यूटी पर न होने की बात स्वीकार की है और बताया कि हथियारबंद बदमाशों द्वारा लूट की जो कहानी पहले बताई गई थी, वह झूठी थी। Add text below Add image below10Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइस चोरी के बाद अब नरवर किले की ओपन कचहरी में सिंधिया राजवंश काल की कुल 14 दुर्लभ ऐतिहासिक तोपों में से केवल 13 तोपें ही बची हैं। चोरी हुई तोप की लंबाई लगभग 5 फीट 10 इंच और चौड़ाई करीब 30 इंच बताई गई है। यह तोप पीतल, तांबा, कांसा और अष्टधातु जैसी मिश्रित धातुओं से बनी है और इस पर फारसी व देवनागरी लिपि में शिलालेख भी अंकित हैं। Add text below Add image below