Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryश्योपुर की एसबीआई शाखा से गोल्ड लोन के 101 पैकेट गायब होने के बहुचर्चित मामले में स्थानीय अदालत ने चार आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है। कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने में विफल रहा।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/sheopur-story-91fc29ee
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteश्योपुर जिले में स्थित भारतीय स्टेट बैंक की स्टेशन रोड शाखा से जुड़े गोल्ड लोन के जेवर गायब होने के हाई-प्रोफाइल मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश बबीता होरा शर्मा की अदालत ने सुनवाई पूरी होने के बाद चारों आरोपियों को बरी कर दिया है। इस फैसले से आरोपियों को बड़ी राहत मिली है। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteतिजोरी की चाबी खोने और ताला बदलने से खुला था राज Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteअदालत में पेश किए गए बयानों के अनुसार, तत्कालीन शाखा प्रबंधक विनोद कुमार लखनपाल ने बताया था कि कैश इंचार्ज राजीव पालीवाल ने 23 अप्रैल 2020 को बैंक की तिजोरी की चाबी गुम होने की लिखित सूचना दी थी। इसके बाद लॉकडाउन की पाबंदियां हटने पर सेफ कंपनी के इंजीनियर 9 जून 2020 को बैंक पहुंचे और ताला बदला गया। Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteताला बदलने के बाद जब बैंक अधिकारियों ने गोल्ड लोन के पैकेटों की गिनती की, तो भारी गड़बड़ी सामने आई। शुरुआती जांच में 90 से अधिक पैकेट कम मिलने पर हड़कंप मच गया। अगले दिन यानी 10 जून को हुई गहन जांच में कुल 214 पैकेटों में से 101 पैकेट गायब पाए गए, जिसके आधार पर 11 जून 2020 को कोतवाली थाने में औपचारिक एफआईआर दर्ज कराई गई थी। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading Quoteबैंक की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteसुनवाई के दौरान अदालत ने शाखा प्रबंधक की गवाही का हवाला देते हुए बैंक की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। कोर्ट ने टिप्पणी की कि बैंक परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगे होने और हर तीन महीने में गोल्ड सेफ की अनिवार्य जांच का नियम होने के बावजूद इतने बड़े पैमाने पर पैकेट गायब होने की भनक किसी को नहीं लगी। गवाही में यह भी सामने आया कि प्रबंधक ने आखिरी बार अगस्त 2019 में सेफ की जांच की थी। Add text below Add image below07Heading Paragraph Heading Subheading Quoteचारों आरोपियों को राहत, मृतक आरोपी के जेवर राजसात Add text below Add image below08Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteअदालत ने स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ चोरी या गबन के आरोपों को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह असफल रहा है। इस मामले के एक अन्य आरोपी बैंककर्मी राजीव पालीवाल की सुनवाई के दौरान ही मौत हो चुकी है, जिन्हें कोर्ट रिकॉर्ड में मृत घोषित किया जा चुका है। Add text below Add image below09Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteफैसला सुनाते हुए न्यायाधीश ने आदेश दिया कि अपील की अवधि समाप्त होने के बाद नवीन गुप्ता, शालिनी गुप्ता, ज्योति गर्ग और रमेशचंद जादौन से जांच के दौरान जब्त किए गए आभूषण उन्हें वापस लौटा दिए जाएं। वहीं, मृतक आरोपी राजीव पालीवाल से जब्त किए गए जेवर पर किसी का दावा न होने के कारण उन्हें सरकार के पक्ष में राजसात करने के निर्देश दिए गए हैं। Add text below Add image below