Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryश्योपुर जिले में आदिवासियों की जमीन पर अवैध कब्जे के मामलों को लेकर उच्च न्यायालय में दो आईएएस अधिकारियों की रिपोर्ट में विरोधाभास सामने आया है। इस प्रशासनिक लापरवाही पर कोर्ट ने गहरी नाराजगी जताई है और राज्य सरकार से नया जवाब मांगा है।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/sheopur-story-6effe829
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteश्योपुर जिले में अनुसूचित जाति और आदिवासी वर्ग के लोगों की जमीनों पर अवैध कब्जे और उन पर दबंगों के दखल से जुड़े मामलों को लेकर अब प्रशासनिक अमला ही आमنے-सामने आ गया है। इस पूरे प्रकरण में स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक लापरवाही और दावों की पोल खुलती नजर आ रही है। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteदो आईएएस अधिकारियों की रिपोर्ट में 151 मामलों का अंतर Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteउच्च न्यायालय में चल रही सुनवाई के दौरान जिले के दो आईएएस अफसरों की रिपोर्ट में 151 प्रकरणों का भारी अंतर सामने आने से हड़कंप मच गया है। पूर्व कलेक्टर संजय कुमार ने 7 फरवरी 2024 को शासन को एक पत्र भेजा था, जिसमें 600 प्रकरण लंबित होने की बात कही गई थी। इसके उलट, वर्तमान कलेक्टर शीला दाहिमा की ओर से अदालत में पेश की गई रिपोर्ट में सिर्फ 449 प्रकरण ही दर्ज बताए गए हैं। Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteबीती 6 अक्टूबर को डब्ल्यूपी क्रमांक 5766/2025 की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इन दोनों आईएएस अधिकारियों के परस्पर विरोधी रुख और प्रशासनिक विरोधाभास पर काफी तल्ख टिप्पणियां कीं। अदालत ने सवाल उठाया कि जब एक जिम्मेदार अधिकारी आधिकारिक पत्र में 600 मामलों का विवरण दे रहा है, तो दूसरे अधिकारी द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में स्थिति इतनी अलग कैसे हो सकती है। न्यायालय ने यह भी नाराजगी जताई कि वर्तमान प्रशासन ने पूर्व कलेक्टर से उनके आंकड़ों के आधार को लेकर कोई पूछताछ नहीं की। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading Quoteउच्च न्यायालय द्वारा उठाए गए गंभीर सवाल और राजस्व अमले की कार्यप्रणाली Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteसुनवाई के दौरान अदालत ने कलेक्ट्रेट और तहसील के लिपिकों की भूमिका पर भी संदेह जताया है। कोर्ट ने आशंका जताई है कि भू-माफियाओं और प्रभावशाली लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए जानबूझकर 151 फाइलों और प्रकरणों को पोर्टल पर दर्ज नहीं किया गया होगा, जिसकी तुरंत जांच होनी चाहिए। Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteअदालत ने पूर्व कलेक्टर के 7 फरवरी 2024 के उस पत्र का भी विशेष तौर पर उल्लेख किया, जिसमें तहसीलदारों, नायब तहसीलदारों और पटवारियों की मिलीभगत से आदिवासियों के पट्टे और जमीन के रिकॉर्ड बदलने की बात कही गई थी। इस पत्र में स्पष्ट किया गया था कि किस तरह राजस्व अमला सांठगांठ कर जमीनों पर अवैध कब्जे करवा रहा है। Add text below Add image below08Heading Paragraph Heading Subheading Quoteसरकार ने मांगा समय, अब 21 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई Add text below Add image below09Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteन्यायालय के सख्त रुख के बाद राज्य सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता विवेक खेडकर ने पिछला जवाब वापस लेने की अनुमति मांगी। अब सरकार इन 151 फाइलों के गायब होने और आंकड़ों के अंतर को स्पष्ट करने के लिए नए सिरे से जांच कर अपना विस्तृत जवाब पेश करेगी। Add text below Add image below10Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइस मामले में उच्च न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पीड़ित वर्ग के अधिकारों की रक्षा के लिए राजस्व रिकॉर्ड की इस गड़बड़ी की तह तक जाया जाए। इस बहुचर्चित प्रकरण की अगली सुनवाई आगामी 21 अक्टूबर 2026 को तय की गई है, जिस पर पूरे अंचल की निगाहें टिकी हुई हैं। Add text below Add image below