Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryदेश में महत्वाकांक्षी चीता परियोजना के चार साल पूरे होने पर कुल संख्या बढ़कर 52 हो गई है, जिनमें से 32 शावकों का जन्म भारतीय धरती पर ही हुआ है। श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क के साथ अब गांधी सागर अभयारण्य में भी चीतों की बसाहट तेजी से फैल रही है।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/sheopur-52-3c94ad10
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteभारत में चीता पुनर्वास परियोजना के चार वर्ष सफलतापूर्वक पूरे हो चुके हैं। इस अवधि के दौरान देश में चीतों की कुल संख्या में उल्लेखनीय इजाफा दर्ज किया गया है और अब यह आंकड़ा बढ़कर 52 तक पहुंच गया है। वर्तमान स्थिति के अनुसार इनमें से 49 चीते श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क में और 3 चीते गांधी सागर अभयारण्य में रह रहे हैं। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteभारतीय धरती पर जन्मी नई पीढ़ी बनी बड़ी सफलता Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteकुल 52 चीतों में से 32 का जन्म भारत में ही हुआ है। प्रोजेक्ट के इन चार वर्षों में नई पीढ़ी का जन्म होना और उनका जंगल में जीवित रहना इस बात का प्रमाण है कि भारतीय पारिस्थितिकी तंत्र इन वन्यजीवों के अनुकूल साबित हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे देश में चीता आबादी के स्थाई रूप से बढ़ने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteविदेशी स्रोतों से लाए गए वन्यजीवों के आंकड़ों पर नजर डालें तो 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से 8 चीते लाए गए थे, जिनमें से 3 अब भी जीवित हैं। भारत में जन्मी उनकी 22 संतानों को जोड़कर नामीबियाई मूल और उनकी अगली पीढ़ी के कुल 25 चीते मौजूद हैं। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading Quoteदक्षिण अफ्रीका और बोत्सवाना से भी बढ़ा कुनबा Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइसके बाद 18 फरवरी 2023 को दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते लाए गए, जिनमें से 8 जीवित हैं। इनकी भारत में जन्मी 10 संतानों को मिलाकर दक्षिण अफ्रीकी मूल के कुल 18 चीते हैं, जिनमें से 15 कूनो और 3 गांधी सागर में रह रहे हैं। इसके अतिरिक्त, इस वर्ष 28 फरवरी 2026 को बोत्सवाना से भी 9 चीते भारत लाए गए हैं। Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteकूनो नेशनल पार्क में मौजूद 49 चीतों में से 17 खुले वन क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से विचरण कर रहे हैं। इनमें 10 नर और 7 मादा शामिल हैं। शेष 32 चीतों को सुरक्षा की दृष्टि से सॉफ्ट रिलीज बाड़ों में रखा गया है, जिनमें 5 नर, 8 मादा और एक साल से कम उम्र के 19 शावक शामिल हैं। Add text below Add image below08Heading Paragraph Heading Subheading Quoteचुनौतियों से उबरकर प्राकृतिक व्यवहार की ओर बढ़ते कदम Add text below Add image below09Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteचीता परियोजना का शुरुआती दौर काफी चुनौतीपूर्ण रहा, जिससे वन्यजीव विशेषज्ञों ने बहुत कुछ सीखा। दूसरे वर्ष में भारत में हुए सफल प्रजनन ने नई उम्मीदें जगाईं। जन्म के बाद 13 शावकों के एक साल से अधिक समय तक जीवित रहने के बाद परियोजना का मुख्य फोकस बाहर से लाए गए जीवों की सुरक्षा से हटकर भारतीय परिवेश में जन्मी पीढ़ी को जंगल के लिए तैयार करने पर केंद्रित हो गया। Add text below Add image below10Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteपरियोजना के तीसरे वर्ष में चीतों को खुले जंगलों में छोड़ा गया और कई जिलों में फैले क्षेत्रों में उनकी चौबीसों घंटे निगरानी की गई। अब चौथे वर्ष में प्रजनन करने वाली मादाओं के स्थापित होने और दूसरी पीढ़ी के शावकों के जीवित रहने से यह पहल मजबूती के मोर्चे पर आगे बढ़ रही है। चीतों में प्राकृतिक व्यवहार दिखने के साथ ही गांधी सागर जैसे अन्य उपयुक्त आवासों की ओर उनका विस्तार भी शुरू हो गया है। Add text below Add image below