Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryकूनो नेशनल पार्क में 49 चीतों की चौबीसों घंटे निगरानी की जा रही है, जिसे दुनिया का सबसे गहन वन्यजीव प्रबंधन कार्यक्रम माना जा रहा है। हाल ही में जारी एक न्यूजलेटर में इस मिशन से जुड़े 'गुमनाम नायकों' के अथक प्रयासों और चुनौतियों का जिक्र किया गया है।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/sheopur-49-6000-912489c5
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteश्योपुर के कूनो नेशनल पार्क ने हाल ही में एक न्यूजलेटर जारी किया है, जिसका शीर्षक 'चीतों का प्रबंधन: कूनो का अनदेखा चमत्कार' है। इसमें प्रोजेक्ट चीता को सफल बनाने में जुटे 'गुमनाम नायकों' के संघर्ष और समर्पण की कहानियाँ सामने आई हैं, जो दिन-रात इस महत्वपूर्ण मिशन को कामयाब बनाने में लगे हैं। Add text below Add image below02Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteवर्तमान में कूनो में कुल 49 चीते हैं, जिनकी व्यक्तिगत स्तर पर प्रतिदिन निगरानी की जा रही है। वन्यजीव प्रबंधन के क्षेत्र में इसे विश्व का सबसे गहन और अद्वितीय कार्यक्रम माना जा रहा है, जिसमें हर एक चीते की गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखी जाती है। Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteये चीते अब केवल कूनो पार्क तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि मध्य प्रदेश और राजस्थान के 12 जिलों में 6000 वर्ग किलोमीटर से अधिक के विशाल क्षेत्र में फैल चुके हैं। इन 49 चीतों में से 30 को सैटेलाइट कॉलर लगाए गए हैं। फिलहाल, 20 चीते खुले जंगल में विचरण कर रहे हैं, जबकि 10 चीतों को 1000 हेक्टेयर के प्राकृतिक बाड़ों में अर्ध-जंगली वातावरण में रखा गया है। Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइतने बड़े भूभाग में खुले घूम रहे इन मांसाहारी जीवों के स्वास्थ्य, गतिविधियों और सुरक्षा पर लगातार नज़र रखना एक बड़ी चुनौती है। फील्ड टीमें दिन-रात रेडियो कॉलर से प्राप्त होने वाले सिग्नलों के आधार पर चीतों का पीछा करती हैं। इस कार्य में फील्ड मैनेजर्स, ट्रैकर्स और फ्रंटलाइन स्टाफ अपनी जान जोखिम में डालकर काम करते हैं। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading Quoteबचाव अभियान: एक बड़ी चुनौती Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteन्यूजलेटर के अनुसार, चीतों का बचाव (रेस्क्यू) ऑपरेशन टीम की सबसे बड़ी परीक्षा होती है। कई बार चीते को बचाने के लिए टीम को कूनो से सैकड़ों किलोमीटर दूर तक जाना पड़ता है। एक मार्मिक घटना का जिक्र करते हुए बताया गया कि तेज बारिश के दौरान जब किसी चीते को बेहोश कर उसका इलाज करना होता है, तब डॉक्टर्स और उनकी टीम खुद पूरी तरह भीग जाती है, लेकिन यह सुनिश्चित करती है कि बेहोश चीते पर पानी की एक बूंद भी न गिरे। इस दौरान टीम के सदस्य ऑक्सीजन सिलेंडर, आईवी ड्रिप और अन्य भारी उपकरण लेकर घंटों तक डटे रहते हैं। Add text below Add image below07Heading Paragraph Heading Subheading Quote'सुपर टीम' की अनूठी भावना Add text below Add image below08Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteपिछले चार सालों में, इस टीम ने भारतीय मौसम की चुनौतियों, घने जंगलों, परजीवियों और इंसानी आबादी वाले इलाकों के बीच काम करते हुए प्रबंधन की नई रणनीतियाँ सीखी हैं। इस पूरे ऑपरेशन की सबसे बड़ी खासियत इसकी मजबूत टीम भावना है। फील्ड में कोई अधिकारी छोटा या बड़ा नहीं होता; योजना बनाने वाले वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर पशु चिकित्सक और ट्रैकर्स तक, सभी एक साथ यात्रा करते हैं, साथ भोजन करते हैं और मिलकर हर चुनौती का सामना करते हैं। इन गुमनाम नायकों के लिए यह केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि देश के एक ऐतिहासिक मिशन को सफल बनाने का गहरा जज्बा है। Add text below Add image below