Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryमुरैना के जैन मंदिर में रत्नकरण्ड श्रावकाचार ग्रंथ के स्वाध्याय के दौरान आचार्य उदार सागर ने सम्यग्दर्शन के आठ अंगों का महत्व समझाया। उन्होंने सर्पदंश का उदाहरण देते हुए साधना में पूर्णता और शुद्धता पर जोर दिया।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/morena-story-e906dc28
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteमुरैना शहर के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती बड़ा मंदिर में इन दिनों धार्मिक आयोजन चल रहे हैं। यहां रत्नकरण्ड श्रावकाचार ग्रंथ के स्वाध्याय का कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है, जिसमें संतों के सान्निध्य में धर्म चर्चा हो रही है। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteसम्यग्दर्शन है मोक्षमार्ग की आधारशिला Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteस्वाध्याय के दौरान आचार्य उदार सागर ने प्रवचन देते हुए सम्यग्दर्शन के आठ अंगों के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सम्यग्दर्शन मोक्षमार्ग की नींव है और इसके सभी आठ अंगों का सही तरीके से पालन किया जाना बेहद जरूरी है। आचार्यश्री ने स्पष्ट किया कि यदि इनमें से किसी एक अंग में भी कमी रह जाती है, तो साधक की मोक्षमार्ग की साधना अधूरी ही मानी जाती है। Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteउन्होंने आगे समझाया कि धर्म के मार्ग पर केवल मात्र श्रद्धा होना ही काफी नहीं है। सच्ची श्रद्धा के साथ-साथ सही ज्ञान और उचित आचरण का होना भी उतना ही आवश्यक है। ये सभी अंग मिलकर व्यक्ति की आध्यात्मिक यात्रा को पूरा करते हैं। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading Quoteसाधना में एक अक्षर की चूक का उदाहरण Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteअपनी बात को स्पष्ट करने के लिए आचार्य उदार सागर ने सर्पदंश का एक सटीक उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि जिस प्रकार सांप के काटने पर विष उतारने वाले मंत्र में यदि एक अक्षर भी कम रह जाए, तो उसका असर खत्म हो जाता है और मंत्र बेअसर साबित होता है। Add text below Add image below07Quote Paragraph Heading Subheading Quoteधर्म साधना में भी आवश्यक अंगों की कोई भी कमी राह में बड़ी बाधा बनती है। इसलिए हर कार्य में शुद्धता, पूर्णता और पूरी सावधानी रखनी चाहिए। Add text below Add image below08Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइस दौरान उन्होंने धरसेन महाराज से जुड़ा एक पुराना प्रसंग भी उपस्थित श्रद्धालुओं को सुनाया। उन्होंने बताया कि कैसे गिरनार पर्वत पर दो मुनियों ने मंत्र की साधना की थी, लेकिन बाद में यह बात सामने आई कि उनके द्वारा जपे जा रहे मंत्र में एक अक्षर कम रह गया था। Add text below Add image below09Heading Paragraph Heading Subheading Quoteआत्मकल्याण और मोक्ष साधना पर जोर Add text below Add image below10Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteकार्यक्रम में मुनि उपशान्तसागर ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि मनुष्य का यह दुर्लभ जन्म केवल भोग-विलासिता में बिताने के लिए नहीं मिला है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य आत्मकल्याण और मोक्ष की साधना करना है। Add text below Add image below11Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteमुनिश्री ने बताया कि पिछले पुण्यों के उदय होने पर ही हमें धर्म के अवसर, संतों का सान्निध्य और भक्ति का लाभ मिलता है। इस अवसर पर उन्होंने अष्ट प्रातिहार्य का जिक्र करते हुए प्रभु अभिषेक के समय पूरी तरह शुद्ध वस्त्र पहनने पर भी विशेष बल दिया। Add text below Add image below12Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteधार्मिक अनुष्ठान के दौरान वर्षायोग समिति के संयोजक रविन्द्र कुमार जैन ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया, जबकि मंच संचालन नवनीत जैन शास्त्री द्वारा किया गया। कार्यक्रम के शुरुआत में पारंपरिक रूप से चित्र अनावरण और दीप प्रज्वलन की रस्म भी पूरी की गई। Add text below Add image below