Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryमुरैना के राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य के बाद अब यमुना नदी में भी डॉल्फिन की आबादी का वैज्ञानिक सर्वेक्षण शुरू कर दिया गया है। इस अध्ययन में भारतीय वन्यजीव संस्थान की 18 विशेषज्ञों की टीम आधुनिक उपकरणों और तकनीकों का उपयोग कर रही है।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/morena-story-81472b57
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteराष्ट्रीय चंबल अभयारण्य क्षेत्र में डॉल्फिन की मौजूदगी और उनकी कुल संख्या का सटीक आकलन करने के लिए वैज्ञानिक पद्धति से सर्वे किया जा रहा है। इसी क्रम में भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून से पहुंचे 18 विशेषज्ञों के दल ने 6 अक्टूबर को देवरी घड़ियाल पुनर्वास केंद्र पर अभयारण्य के मैदानी अमले और अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया था। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteचंबल के बाद यमुना में अभियान का विस्तार Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteविशेषज्ञों की टीम ने प्रशिक्षण के पश्चात 7 से 14 अक्टूबर तक दो मोटर बोट्स के माध्यम से चंबल नदी में नगर से लेकर पचनदा तक विस्तृत सर्वे कार्य पूरा किया। इस सफल चरण के बाद, अधिकारियों के निर्देश पर 16 अक्टूबर से यमुना नदी में भी डॉल्फिन की खोज और उनकी स्थिति जानने के लिए सर्वे का नया दौर शुरू कर दिया गया है। Add text below Add image below04Heading Paragraph Heading Subheading Quoteअत्याधुनिक उपकरणों और तकनीकों का हो रहा इस्तेमाल Add text below Add image below05Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteचंबल घड़ियाल अधीक्षक श्याम सिंह चौहान के अनुसार, जलीय जीवों के इस अध्ययन में पूरी तरह से आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों की मदद ली जा रही है। इनमें एफ-पॉड्स (F-PODs) और ए-टैग्स जैसे विशेष उपकरण शामिल हैं, जो पानी के भीतर डॉल्फिन द्वारा छोड़े जाने वाले ध्वनि संकेतों यानी इकोलोकेशन क्लिक को रिकॉर्ड करने का कार्य करते हैं। इन तकनीकी रिकॉर्डिंग से जल के अंदर जीवों की आवाजाही का स्पष्ट अनुमान लगाया जाता है। Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइसके अलावा सर्वेक्षण दल द्वारा जीपीएस, लेजर रेंजफाइंडर और उच्च क्षमता वाली दूरबीनों का उपयोग करके डॉल्फिन की भौगोलिक स्थिति, उनकी आपसी दूरी और मौजूदगी को दर्ज किया जा रहा है। इन उपकरणों की मदद से नदी की अन्य जैव विविधता पर भी बारीक नजर रखी जा रही है। Add text below Add image below07Heading Paragraph Heading Subheading Quoteजल गुणवत्ता और पर्यावरणीय डीएनए (eDNA) की जांच Add text below Add image below08Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteडॉल्फिन के प्राकृतिक रहवास की वास्तविक दशा परखने के लिए YSI ProDSS यंत्र के जरिए नदी के पानी की गुणवत्ता जांची जा रही है। साथ ही, चार्ट प्लॉटर और डेप्थ साउंडर से जल प्रवाह के मार्ग और गहराई का अध्ययन हो रहा है। इस सर्वे में ई-डीएनए (eDNA) सैंपलिंग तकनीक का भी प्रयोग किया जा रहा है, जिससे पानी के नमूनों में मौजूद डीएनए अंशों के आधार पर जलीय प्रजातियों की उपस्थिति का पता लगाया जा सके। Add text below Add image below