Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryमुरैना जिले की जौरा उप-कोषालय और कलेक्टर कार्यालय में सरकारी अभिरक्षा से सोने के आभूषण गायब होने के मामले में ग्वालियर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/morena-gold-jewellery-missing-case-high-court-questions-state-government
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteमुरैना गोल्ड ज्वेलरी गायब मामला: हाईकोर्ट ने सरकार और अधिकारियों को लगाई फटकार, वरिष्ठ अधिकारी से मांगा शपथपत्र Add text below Add image below02Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteमुरैना। जिले की जौरा उप-कोषालय और कलेक्टर कार्यालय की सरकारी अभिरक्षा में रखे गए सोने के आभूषणों के गायब होने के मामले में ग्वालियर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों के रवैये पर गंभीर नाराजगी जताई है। अदालत ने माना कि प्रथम दृष्टया रिकॉर्ड से अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध दिखाई देती है और पूरे घटनाक्रम में गंभीर लापरवाही अथवा मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता। Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteअसली गहने गायब, नकली आभूषण रखे गए Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteसुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह तथ्य रखा गया कि सरकारी सुरक्षा में रखे गए असली सोने के आभूषण गायब हो गए थे, जबकि उनकी जगह नकली आभूषण रख दिए गए। इतना ही नहीं, इस पूरे मामले से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को कई वर्षों तक न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया। Add text below Add image below05Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteहाईकोर्ट ने अधिकारियों की भूमिका पर उठाए सवाल Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteडिवीजन बेंच ने कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड यह संकेत देता है कि संबंधित अधिकारी या तो अपने दायित्वों के प्रति अत्यधिक लापरवाह रहे या फिर पूरे मामले में शामिल लोगों के साथ उनकी संभावित मिलीभगत रही। अदालत ने इस स्थिति को बेहद गंभीर बताते हुए जवाबदेही तय करने की आवश्यकता जताई। Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteसरकार ने CID जांच आदेश वापस लेने की मांग की Add text below Add image below08Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteराज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता ने अदालत में आवेदन प्रस्तुत कर पहले दिए गए सीआईडी जांच के आदेश को वापस लेने का अनुरोध किया। सरकार का तर्क था कि इस मामले में पहले ही एफआईआर दर्ज की जा चुकी थी और वर्ष 2019 में निचली अदालत आरोपियों को बरी कर चुकी है। Add text below Add image below09Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteअदालत ने पूछा—यह तथ्य पहले क्यों छिपाया गया? Add text below Add image below10Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteसरकारी पक्ष की दलील पर हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए पूछा कि यदि एफआईआर दर्ज थी और मुकदमे की सुनवाई चल रही थी, तो यह जानकारी पहले कभी न्यायालय को क्यों नहीं दी गई। इस पर सरकारी पक्ष ने स्वीकार किया कि यह तथ्य न तो लिखित रूप में और न ही मौखिक रूप से अदालत के सामने रखा गया था। Add text below Add image below11Paragraph Paragraph Heading Subheading Quote2017 से 2019 तक न्यायालय से छिपी रही जानकारी Add text below Add image below12Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteरिकॉर्ड की समीक्षा में सामने आया कि वर्ष 2017 से 2019 के बीच मामला कई बार हाईकोर्ट में सूचीबद्ध हुआ, लेकिन हर बार लंबित आपराधिक प्रकरण और ट्रायल की जानकारी अदालत से छिपाई गई। यहां तक कि आरोपियों के बरी होने के बाद भी न्यायालय को इसकी जानकारी नहीं दी गई। Add text below Add image below13Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteवरिष्ठ अधिकारी से मांगा गया व्यक्तिगत शपथपत्र Add text below Add image below14Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteमामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से कई सवालों के जवाब मांगे हैं। अदालत ने पूछा है कि तत्कालीन जौरा उप-कोषालय अधिकारी और मुरैना कलेक्टर ने एफआईआर और लंबित ट्रायल की जानकारी न्यायालय से क्यों छिपाई। साथ ही रिट अपील दाखिल करते समय इन महत्वपूर्ण तथ्यों का उल्लेख क्यों नहीं किया गया। Add text below Add image below15Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteअदालत ने निर्देश दिए हैं कि मुरैना कलेक्टर से वरिष्ठ स्तर के अधिकारी—संभागायुक्त या शासन के सचिव स्तर के अधिकारी—व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी और जवाब प्रस्तुत करें। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इतने गंभीर मामले में केवल अधीनस्थ अधिकारियों का स्पष्टीकरण पर्याप्त नहीं माना जाएगा। Add text below Add image below16Paragraph Paragraph Heading Subheading Quote20 जुलाई को होगी अगली सुनवाई Add text below Add image below17Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteहाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को निर्धारित की है। तब तक राज्य सरकार को सभी प्रश्नों के विस्तृत जवाब और संबंधित रिकॉर्ड न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। Add text below Add image below