Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryजौरा तहसील के कांसपुरा गुड आसान गांव के किसान बनवारी लाल कुशवाह ने गेहूं और बाजरा की जगह गेंदे की खेती अपनाई है। कम लागत और बेहतर मांग के चलते उन्हें प्रति बीघा बंपर मुनाफा मिल रहा है।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/morena-55-0d7c7859
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteखेती किसानी में लगातार बढ़ती लागत और पारंपरिक फसलों से मिलने वाले सीमित मुनाफे के बीच मुरैना जिले के किसानों ने अब अपनी आय बढ़ाने के लिए नए रास्ते तलाशने शुरू कर दिए हैं। जौरा तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम कांसपुरा गुड आसान के रहने वाले 55 वर्षीय किसान बनवारी लाल कुशवाह ने अपनी पारंपरिक खेती के तरीके में बदलाव कर एक बेहतरीन उदाहरण पेश किया है। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteउद्यानिकी विभाग की सलाह से बदली फसलों की दिशा Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteआज से करीब पांच साल पहले तक बनवारी लाल के खेतों में मुख्य रूप से गेहूं और बाजरा ही उगाया जाता था। कड़ी मेहनत के बाद भी लागत के मुकाबले मुनाफा काफी कम रहता था, जिससे वे संतुष्ट नहीं थे। इसी दौरान वे उद्यानिकी विभाग के संपर्क में आए, जहां उन्हें फसल विविधीकरण और गेंदे की व्यावसायिक खेती के बारे में विस्तार से समझाया गया। विभाग के मार्गदर्शन पर भरोसा करते हुए उन्होंने शुरुआत में अपने खेत के केवल 10 बिस्वा हिस्से में गेंदे के पौधे रोपे। Add text below Add image below04Heading Paragraph Heading Subheading Quoteदो महीने में हुई 80 हजार तक की बिक्री Add text below Add image below05Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteशुरुआती सफलता से उत्साहित होकर उन्होंने इसका दायरा बढ़ाया। किसान ने बताया कि एक बीघा जमीन में गेंदे की फसल से उन्हें लगभग 70 से 80 हजार रुपये की कुल आय प्राप्त हुई। इस कुल कमाई में से करीब 25 हजार रुपये की लागत निकालने के बाद उनके हाथ में 55 हजार रुपये का शुद्ध मुनाफा बचा। उनके अनुसार यह आमदनी पारंपरिक तौर पर उगाई जाने वाली गेहूं और बाजरा की फसलों की तुलना में दोगुनी से भी अधिक है। Add text below Add image below06Heading Paragraph Heading Subheading Quoteएक ही खेत से फूल और अनाज दोनों की पैदावार Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteबनवारी लाल के लिए यह खेती फसल चक्र के लिहाज से भी काफी फायदेमंद साबित हो रही है। जुलाई के महीने में रोपे गए पौधों से उन्हें अक्टूबर से दिसंबर तक लगातार फूल मिलते हैं। जैसे ही गेंदे का उत्पादन समाप्त होता है, वे उसी खेत में गेहूं की बुवाई कर देते हैं। इस तरह उन्हें एक ही जमीन से नकदी फसल के साथ-साथ अनाज की पैदावार भी मिल जाती है। Add text below Add image below08Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteमानसून के दिनों में गेंदे की फसल को सिंचाई की बहुत कम आवश्यकता होती है, जबकि अक्टूबर और नवंबर के दौरान लगभग पंद्रह दिन के अंतराल पर पानी देना काफी रहता है। स्थानीय बाजारों में फूलों की लगातार मांग बनी रहने के कारण उन्हें अच्छे दाम मिल रहे हैं। वे अपनी उपज को मुरैना के अलावा ग्वालियर और आगरा की मंडियों में बेचते हैं, जहां उन्हें 60 रुपये प्रति किलो तक का भाव मिल जाता है। Add text below Add image below